पटना: बिहार में पिछले 10 सालों से शराबबंदी कानून लागू है। इसके तहत प्रदेश में किसी तरह की शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध है। इस बीच, बिहार में भाजपा के सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने शराबबंदी कानून की समीक्षा करने की अपनी पुरानी मांग दोहराई है।
उन्होंने साफ लहजे में कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून की नहीं, नशामुक्ति के लिए जागरूकता अभियान चलना चाहिए। विधायक माधव आनन्द ने गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर उन्हें सीएम बनने पर बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि शराबबंदी कानून लागू हुए 10 साल हो गए हैं। अब वह वक्त आ गया है कि शराबबंदी की विस्तृत समीक्षा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मैं इसके पहले भी सदन में इसको लेकर अपनी बात कही है, जिसका कई लोगों ने दबी आवाज में समर्थन भी किया था। कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया था। उन्होंने कहा कि मैं उतना ही गंभीर सदन के अंदर था और बाहर जब आया, तो उतना ही गंभीर हूं। शराबबंदी की विस्तृत समीक्षा होनी चाहिए।
एनडीए में शामिल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने कहा कि नई सरकार बनी है, सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने हैं। आज भी मैं अपनी ही सरकार से इसे लेकर मांग करता हूँ। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के कारण राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है। बिहार को विकसित बनाने के लिए राजस्व की आवश्यकता है। बिहार को नुकसान हो रहा है। सारी चीजों को ध्यान में रखते हुए शराबबंदी की समीक्षा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमने अपनी बात रखी है, अब सरकार को जनहित को देखते हुए फैसला लेना है। बता दें कि शराबबंदी कानून बनने के बाद से इसे लेकर राजनीति खूब होती रही है। सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के लोग इसके पक्ष और विपक्ष में अपनी बात रखते रहे हैं।
--आईएएनएस
