Bardhaman Durgapur Seat : 7 में से 6 विधानसभा सीटों पर टीएमसी का कब्जा, सिर्फ 1 शहरी सीट पर बची भाजपा

बर्धमान-दुर्गापुर: ग्रामीण-शहरी मतदाताओं की बदलती रणनीति और टीएमसी का दबदबा।
बर्धमान-दुर्गापुर का सियासी गणित : 7 में से 6 विधानसभा सीटों पर टीएमसी का कब्जा, सिर्फ 1 शहरी सीट पर बची भाजपा

कोलकाता: साल 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई बर्धमान-दुर्गापुर संसदीय क्षेत्र (संख्या 39) का चुनावी मिजाज किसी फिल्म से कम नहीं है। यहां का मतदाता किसी एक विचारधारा को मानने वाला नहीं, बल्कि वह अपनी जरूरतों के हिसाब से सत्ता बदलता है।

2009 के लोकसभा चुनाव में यह वामपंथ (सीपीआई-एम) का ऐसा अभेद्य किला था, जिसने पूरे राज्य में चल रही ममता बनर्जी की लहर को भी रोक दिया था।

2014 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की चुनावी लहर ने आखिरकार इस लाल दुर्ग को ढहा दिया, और तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार यहां झंडा गाड़ा।

2019 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रवाद और सत्ता-विरोधी लहर के एक ऐसे 'परफेक्ट स्टॉर्म' ने जन्म लिया कि वामपंथ के वोटर भाजपा की तरफ मुड़ गए। भाजपा के एसएस अहलूवालिया ने मात्र 2,439 वोटों के अंतर से टीएमसी को हराया।

2024 के लोकसभा चुनाव में कहानी में फिर ट्विस्ट आया, और टीएमसी ने 1.37 लाख से ज्यादा वोटों के विशाल अंतर से इस सीट पर शानदार वापसी की।

इस लोकसभा क्षेत्र का असली गणित इसके 7 विधानसभा क्षेत्रों में छिपा है। 5 ग्रामीण (पूर्व बर्धमान) और 2 शहरी/औद्योगिक (पश्चिम बर्धमान) सीटों से मिलकर बनी यह लोकसभा एक राजनीतिक भूलभुलैया है।

बर्धमान दक्षिण : यह पूर्व बर्धमान का दिल और व्यापारिक केंद्र है। यहां मध्यम वर्ग और व्यापारियों की बहुलता है। इस सीट पर टीएमसी से खोकन दास मौजूदा विधायक हैं।

मोंटेश्वर : यह पूरी तरह से ग्रामीण और कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहां अल्पसंख्यक मतदाताओं का एक बड़ा और निर्णायक तबका है, जो इसे तृणमूल का अभेद्य किला बनाता है। इस सीट पर टीएमसी से सिद्दीकउल्लाह चौधरी मौजूदा विधायक हैं।

बर्धमान उत्तर (एससी) : यह एक आरक्षित सीट है, जहां दलित (एससी) मतदाताओं की सघन आबादी है। यहां का मिजाज उपनगरीय है। वर्तमान विधायक टीएमसी के निशिथ कुमार मलिक हैं।

भातर : यहां की अर्थव्यवस्था की धुरी सिर्फ और सिर्फ धान की खेती है। यहां चुनाव विचारधारा पर नहीं, बल्कि 'कृषक बंधु' जैसी योजनाओं और खाद के दामों पर लड़े जाते हैं। इस विधानसभा सीट से मौजूदा टीएमसी विधायक मानगोबिंद अधिकारी हैं।

गलसी (एसी) : यह भी एक आरक्षित ग्रामीण सीट है। यहां भूमिहीन खेतिहर मजदूरों और सीमांत किसानों की बड़ी आबादी है। यहां के वर्तमान विधायक टीएमसी के नेपाल घोरुई हैं।

दुर्गापुर पूर्व : यहां औद्योगिक क्षेत्र दुर्गापुर के कुछ हिस्से और ग्रामीण इलाके दोनों मिलते हैं। इस सीट से मौजूदा विधायक प्रदीप मजूमदार हैं, जो टीएमसी से हैं।

दुर्गापुर पश्चिम : यह पूरे लोकसभा क्षेत्र का इकलौता पूर्णतः शहरी, औद्योगिक और हिंदी भाषी बहुल इलाका है। इस्पात संयंत्रों और श्रमिक संघों वाले इस क्षेत्र ने अपना अलग मिजाज कायम रखा है। इस सीट पर भाजपा से लक्ष्मण चंद्र घोरुई मौजूदा विधायक हैं।

7 में से 6 विधानसभा सीटों पर टीएमसी का कब्जा है। भाजपा सिर्फ एक शहरी सीट (दुर्गापुर पश्चिम) तक सिमट कर रह गई है।

2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने बड़े दांव खेले। भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद को हटाकर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को मैदान में उतारा। दूसरी तरफ, टीएमसी ने पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद पर दांव लगाया।

जब विचारधारा के सारे समीकरण फेल हो गए, तब राज्य सरकार का 'कल्याणकारी अर्थशास्त्र' मैदान में उतरा। टीएमसी ने 2024 का चुनाव 'लक्खीर भंडार' (महिलाओं को नकद सहायता), 'स्वास्थ्य साथी' और 'खाद्य साथी' जैसी योजनाओं के जनमत संग्रह में बदल दिया। यहां से कीर्ति आजाद ने जीत हासिल की।

--आईएएनएस

 

 

Related posts

Loading...

More from author

Loading...