जयपुर, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को जोधपुर में बहुस्तरीय पार्किंग परियोजना में हो रही देरी पर राज्य सरकार से सवाल करते हुए इसे भाजपा सरकार की 'देरी और उपेक्षा की नीति' का प्रतिबिंब बताया।
अपने डिजिटल चैनल 'इंतजार शास्त्र' के तहत अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में गहलोत ने कहा कि जोधपुर की नई सड़क पर बन रही यह परियोजना निष्क्रिय शासन का प्रतीक बन गई है।
उन्होंने कहा कि जो परियोजना वर्षों पहले पूरी हो जानी चाहिए थी, वह भाजपा की अदूरदर्शी सोच के कारण अधर में लटकी हुई है। यह 'इंतजार शास्त्र' का जीता-जागता उदाहरण है।
इस पार्किंग परियोजना की परिकल्पना यातायात को सुचारू बनाने और क्षेत्र में पार्किंग की सुविधा प्रदान करने के लिए की गई थी। इसे 2013 में 675 वाहनों की क्षमता के साथ शुरू किया गया था। लगभग 2,317 वर्ग मीटर भूमि की पहचान की गई और इसके कार्यान्वयन के लिए 28 करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित की गई। चूंकि यह भूमि पुलिस कंट्रोल रूम कक्ष की थी, इसलिए इस स्थल पर एक नए पुलिस कंट्रोल रूम भवन की भी योजना बनाई गई थी।
गेहलोत ने आरोप लगाया कि 2013 में सत्ता में आने के बाद, भाजपा सरकार ने जोधपुर के लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज करते हुए जानबूझकर इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजना को पांच वर्षों तक रोक रखा था।
कांग्रेस के कार्यकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमने 2018 में परियोजना को पुनर्जीवित किया और 2020-21 में कोविड-19 महामारी के कारण अभूतपूर्व व्यवधान के बावजूद, हमने 2022 में पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम फिर से शुरू किया।
मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना दिसंबर 2024 तक पूरी होनी थी, लेकिन अब भाजपा धन की कमी का बहाना बनाकर शेष काम रोक रही है और समय सीमा 2026 तक बढ़ा दी गई है। इसकी वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि यह परियोजना निर्धारित समय में पूरी हो पाएगी।
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