Ladakh Border Development : लद्दाख के मुख्य सचिव व सेना प्रमुख की मुलाकात, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर हुई बात

लद्दाख के सीमांत गांवों के विकास पर सेना और प्रशासन का फोकस
लद्दाख के मुख्य सचिव व सेना प्रमुख की मुलाकात, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर हुई बात

नई दिल्ली: भारतीय सेना लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों में ढांचागत विकास पर लगातार फोकस करती रही है। सेना प्रमुख ने लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में चल रही विकास परियोजनाओं पर लद्दाख के मुख्य सचिव से चर्चा की है।

दरअसल लद्दाख के नामित मुख्य सचिव ने यहां नई दिल्ली में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के बीच लद्दाख स्थित इंडिया के फर्स्ट विलेजिस में चल रहे और प्रस्तावित विकास कार्यों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

गौरतलब है कि सेना और सरकार का उद्देश्य इन गांवों को अधिकतम ढांचागत सुविधाएं मुहैया कराना है। इसके साथ ही कठिन मौसम में लद्दाख के अधिकांश इलाकों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़े रखने के महत्वपूर्ण प्रयास भी किए गए हैं। ऐसे में लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा की सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से हुई शिष्टाचार भेंट काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस मुलाकात में सेना प्रमुख व लद्दाख के मुख्य सचिव ने लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों के गावों के विकास पर बात की। बैठक में यह रेखांकित किया गया कि लद्दाख जैसे सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में संपूर्ण-सरकार दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है। इससे सीमांत इलाकों का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों के साथ तालमेल बिठाकर आगे बढ़ सकेगा। लद्दाख में विशेष रूप से सड़क व संचार अवसंरचना, ऊर्जा समाधान, पर्यटन-संबंधी अवसरों, आजीविका सुधार तथा स्थानीय समुदायों की आवश्यकताओं को पूरा करने के उपाय किए जा रहे हैं।

जनरल द्विवेदी और आशीष कुंद्रा दोनों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सिविल-मिलिट्री समन्वय को मजबूत करने से न केवल सीमांत क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा को भी और अधिक सुदृढ़ बनाएगा। सेना और प्रशासन के बीच तालमेल के जरिए दूरस्थ गांवों में कनेक्टिविटी बढ़ाने, बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराने और रोजगार के नए अवसर विकसित करने में तेजी लाई जा सकती है।

मुलाकात ने यह संकेत दिया कि लद्दाख में आगामी महीनों में सीमा क्षेत्रों के विकास के लिए एकीकृत प्रयास और अधिक गति पकड़ेंगे। इससे भारत के प्रथम गांव न केवल बुनियादी सुविधाओं से सशक्त होंगे, बल्कि राष्ट्रीय गर्व और सामरिक मजबूती के स्तंभ के रूप में भी उभरेंगे।

गौरतलब है कि इसी माह लद्दाख में दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड पर निर्मित 900 मीटर लंबी श्योक टनल शुरू की गई है। 920 मीटर लंबी श्योक टनल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुनिया के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण इलाकों में निर्मित इंजीनियरिंग मार्वल बताया था।

उन्होंने बताया कि यह टनल भारी बर्फबारी, हिमस्खलन और जटिल मौसम वाले इस क्षेत्र में सुरक्षा, मोबिलिटी और विशेषकर कड़ाके की ठंड के दौरान सैन्य तैनाती क्षमता को कई गुना बढ़ाएगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख में श्योक टनल के साथ-साथ यहां से सीमा सड़क संगठन की 125 रणनीतिक महत्व की अवसंरचना परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया था।

इन परियोजनाओं में 28 सड़कें, 93 पुल और 04 अन्य सामरिक अवसंरचना परियोजनाएं शामिल हैं। ये परियोजनाएं 7 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों में फैली हुई हैं।

 

Related posts

Loading...

More from author

Loading...