नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। आज की तेज रफ्तार और व्यस्त जीवन में पेट्रोल-डीजल की चिंता किए बिना यात्रा करने का सबसे सस्ता और स्वास्थ्यवर्धक तरीका है साइकिल चलाना। साइकिल न सिर्फ सफर को आसान बनाती है बल्कि शरीर और मन दोनों को चुस्त-दुरुस्त रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ साइकिल को सेहत का सच्चा साथी मानते हैं।
हर साल 3 जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है। ऐसे में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के साथ ही हेल्थ एक्सपर्ट्स भी साइकिलिंग को बेहद फायदेमंद बताते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, नियमित साइकिल चलाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों मजबूत होते हैं। यह एक ऐसा व्यायाम है, जो रोजमर्रा की भागदौड़ में आसानी से शामिल किया जा सकता है।
साइकिलिंग से दिमाग तेज और चुस्त होता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि रोजाना साइकिल चलाने से याददाश्त सुधरती है और एकाग्रता बढ़ती है। इसमें शरीर में एंडॉर्फिन हॉर्मोन निकलता है, जिसे खुशी का हॉर्मोन कहा जाता है। इससे तनाव, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याएं दूर होती हैं।
यह हल्का-फुल्का व्यायाम है, इसलिए घुटनों और जोड़ों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। पुराने दर्द से परेशान लोग भी इसे आसानी से कर सकते हैं। ताजी हवा में साइकिल चलाने से रचनात्मक सोच बढ़ती है और दिमाग को नई ऊर्जा मिलती है। जिन लोगों को अनिद्रा की शिकायत है, उनके लिए साइकिलिंग बहुत उपयोगी साबित होती है। नियमित साइकिलिंग से रात में गहरी और आरामदायक नींद आती है। वजन कम करने में भी यह कारगर है। आधे घंटे की मध्यम गति वाली साइकिलिंग से 200 से 300 कैलोरी बर्न हो सकती है, जिससे मोटापा नियंत्रित रहता है।
इसके अलावा, साइकिलिंग हृदय को मजबूत बनाती है, ब्लड शुगर को कंट्रोल करती है, डायबिटीज का खतरा घटाती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। शहरों में बढ़ते ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को देखते हुए साइकिलिंग पर्यावरण को बचाने में भी मदद करती है।
हालांकि, कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। साइकिलिंग ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन कुछ खास स्थितियों में सावधानी बरतनी चाहिए। गंभीर हृदय रोग वाले मरीजों, हाल ही में सर्जरी कराए लोगों, चक्कर आने की समस्या, गंभीर गठिया या जोड़ों में सूजन वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को बिना चिकित्सकीय सलाह के साइकिलिंग नहीं करनी चाहिए।