तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री अरुणराज ने नीट विरोधी रुख दोहराया, बेहतर मरीज देखभाल पर जोर दिया

चेन्नई, 20 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. केजी अरुणराज ने बुधवार को नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (नीट) के प्रति राज्य सरकार के विरोध को दोहराया। उन्होंने इसे एक ऐसी व्यवस्था बताया जो राज्यों के अधिकारों को कमजोर करती है और मेडिकल शिक्षा पाने के इच्छुक आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए बाधाएं खड़ी करती हैं।

मद्रास मेडिकल कॉलेज (एमएमसी) में अपनी पहली आधिकारिक समीक्षा बैठक के दौरान बोलते हुए मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा के विरोध में सरकार का रुख अडिग है और तमिलनाडु इस मुद्दे पर अपनी चिंताएं उठाता रहेगा।

उन्होंने कहा, “हमने बार-बार अपना रुख स्पष्ट किया है। हम नीट के पक्ष में नहीं हैं और इसका विरोध जारी रखेंगे। यह राज्यों के अधिकारों के खिलाफ है और गरीब तथा वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों को प्रभावित करता है।”

डॉ. अरुणराज ने उन प्रयासों की भी आलोचना की, जिन्हें उन्होंने केंद्रीकृत व्यवस्थाओं के जरिए एक विविध देश पर एकरूपता थोपने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता का सम्मान किया जाना चाहिए और शिक्षा से जुड़ी नीतियों में अलग-अलग राज्यों की सामाजिक और शैक्षिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए।

उनकी यह टिप्पणी नीट को लेकर तमिलनाडु के लंबे समय से चले आ रहे विरोध के बीच आई है। राज्य की लगातार सरकारों का मानना रहा है कि यह परीक्षा ग्रामीण छात्रों और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्रों पर असमान रूप से असर डालती है।

मेडिकल एडमिशन पर राजनीतिक रुख के अलावा, अरुणराज ने इस अवसर का उपयोग सरकार की स्वास्थ्य सेवा प्राथमिकताओं को रेखांकित करने के लिए किया। उन्होंने संकेत दिया कि पूरे राज्य में सरकारी अस्पतालों में मरीजों के अनुभव को बेहतर बनाने और देखभाल के मानकों को सुधारने की दिशा में बड़ा बदलाव हो रहा है।

मंत्री, जिन्होंने मद्रास मेडिकल कॉलेज से अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी की थी, ने एक आधिकारिक पद पर अपने पुराने शिक्षण संस्थान में लौटने पर व्यक्तिगत खुशी व्यक्त की।

उन्होंने कहा, “एमएमसी मेरा कॉलेज है। मैंने यहां से मेडिकल की पढ़ाई की है और मैं यहां लौटकर खुश हूं।”

सरकार के स्वास्थ्य सेवा संबंधी दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए अरुणराज ने कहा कि मरीजों का कल्याण ही प्रशासन की नीतियों का मुख्य केंद्र रहेगा। उन्होंने अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिया कि वे बेहतर उपचार मानक प्रदान करें और अस्पताल में अधिक सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने पर ध्यान दें।

उन्होंने कहा, “अंतिम परिणाम वही महत्वपूर्ण है, जो मरीजों को मिलने वाली देखभाल की गुणवत्ता को दर्शाता है। अच्छी स्वास्थ्य सेवा और अस्पताल का अच्छा अनुभव हर व्यक्ति का बुनियादी अधिकार है। हम चाहते हैं कि लोगों का सरकारी अस्पतालों पर अधिक भरोसा हो और वे साफ-सुथरे और कुशल वातावरण में इलाज करवाने में सहज महसूस करें।”

मंत्री ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से भी आग्रह किया कि वे सरकार के स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम को लागू करने और राज्य के चिकित्सा संस्थानों पर जनता का भरोसा बढ़ाने में पूरा सहयोग दें।

--आईएएनएस

एसएचके/डीकेपी

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