सिर्फ अनार ही नहीं, इसका छिलका भी है औषधीय गुणों से भरपूर, अतिसार से लेकर कब्ज में मिलेगी राहत

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। अनार सितंबर से फरवरी तक आसानी से मिल जाता है, लेकिन आज के समय में ग्रीन हाउस और कोल्ड स्टोरेज की वजह से साल भर मीठे अनार का आनंद लिया जा सकता है। अनार एक ऐसा फल है कि जिसका छिलका भी कई रोगों से निजात दिलाने में मदद करता है। आयुर्वेद में अनार को दाडिम कहा जाता है, जो केवल फल नहीं, बल्कि औषधि है।

आयुर्वेद में अनार को वात, कफ और पित्त संतुलित करने वाला फल माना जाता है, जो शरीर में रक्त को बढ़ाता है और कमजोरी से भी बचाता है। अनार पाचन को समर्थ बनाता है, रक्त को पोषित करता है, त्वचा को निखारता है और शरीर को भीतर से बल देता है।

अगर चेहरे पर मुहांसे और गहरे दाग-धब्बे परेशान करते हैं, तो अनार के छिलके से बना पेस्ट चेहरे में नई जान डाल देता है। इसके लिए अनार के छिलके के चूर्ण को गुलाबजल के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें। पेस्ट को चेहरे पर हफ्ते में दो बार लगाएं। यह फेसपैक चेहरे पर पनप रहे बैक्टीरिया को खत्म करता है, जिससे मुहांसे और एक्ने कम होते हैं।

गर्मियों में अक्सर अतिसार की परेशानी होती है क्योंकि थोड़ा सा भी तेलीय खाना खाने के बाद पेट की पाचन शक्ति प्रभावित होती है। ऐसे में अतिसार होना आम बात है। इसके लिए अनार के छिलके के पाउडर को छाछ में मिलाकर जीरे के साथ सेवन करें। ऐसा करने से पेट में पल रहे हानिकारक बैक्टीरिया खत्म होंगे और आंतों की सूजन भी कम होगी।

बच्चों को अक्सर पेट में कीड़ों होने की शिकायत बनी रहती है। ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चें बिना हाथ धोए खाना खा लेते हैं। ऐसे में रोजाना बच्चे को खाली पेट अनार के दानों का सेवन कराना चाहिए। इससे आंतों पर पल रहे कीड़ों का नाश होता है और पेट में होने वाले दर्द से भी राहत मिलती है। इसके अलावा अगर हीमोग्लोबिन की कमी है, तब भी रोजाना 1 अनार का सेवन किया जा सकता है। अनार का जूस पीने से बचें। अनार के जूस में फाइबर कम होता है और यह शरीर को सिर्फ पानी की तरह लगता है। कोशिश करें कि अनार के दानों का सेवन करें।

बवासीर में भी अनार के छिलके के पाउडर का सेवन करना लाभकारी होता है। आयुर्वेद के मुताबिक अनार के छिलके के पाउडर को छाछ के साथ लेने से आराम मिलेगा और पेट में कब्ज भी नहीं होगी।

--आईएएनएस

पीएस/वीसी

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