पाकिस्तान के बच्चों में बढ़ता लेड खतरा, दस में से चार के खून में मिला सीसा

इस्लामाबाद, 3 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के सात हाई-रिस्क इलाकों में रहने वाले 12-36 महीने के बच्चों पर किए गए एक नए अध्ययन में हर 10 में से चार बच्चों के खून में लेड (सीसा) पाया गया। यह स्टडी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा, नियमन और समन्वय मंत्रालय और यूनिसेफ ने मिलकर की है।

यूनिसेफ के मुताबिक, लेड के संपर्क में आने से बच्चों की ग्रोथ रुक सकती है। खून की कमी हो सकती है और इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ सकता है। इसके अलावा, इससे आईक्‍यू कम हो सकता है, ध्यान देने की क्षमता घटती है और याददाश्त पर भी असर पड़ता है। इससे बच्चों में पढ़ाई में दिक्कतें और व्यवहार से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

स्टडी में लेड के संपर्क में आने के कई संभावित स्रोत पहचाने गए हैं, जैसे फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं, बैटरियों की अनौपचारिक रीसाइक्लिंग, लेड वाला पेंट, दूषित खाना, मसाले और पारंपरिक कॉस्मेटिक्स।

यूनिसेफ के अनुसार, इस स्टडी में 2,100 बच्चों के सैंपल लिए गए, जो जोहरिपुर, इस्लामाबाद, कराची, लाहौर, पेशावर, क्वेटा और रावलपिंडी जैसे इंडस्ट्रियल इलाकों में रहते हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि हत्तार और हरिपुर के 88 प्रत‍िशत बच्चों के खून में लेड का स्तर बहुत ज्यादा था, जो सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं। वहीं, इस्लामाबाद में यह आंकड़ा सिर्फ एक प्रत‍िशत था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान में करीब 10 में से 8 बच्चे लेड के असर में हो सकते हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। इससे बच्चों की सीखने की क्षमता कम होती है, जिसका देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है। अनुमान है कि इससे हर साल जीडीपी का 6-8 प्रत‍िशत यानी लगभग 25-35 बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है।

यूनिसेफ की पाकिस्तान प्रतिनिधि पर्निले आयरनसाइड ने कहा, “बच्चे बड़े लोगों की तुलना में पांच गुना ज्यादा लेड सोख सकते हैं, इसलिए वे ज्यादा खतरे में होते हैं। लेड शरीर के हर हिस्से को प्रभावित करता है, लेकिन दिमाग पर इसका असर बहुत गंभीर और हमेशा के लिए हो सकता है। बच्चों के लिए लेड का कोई भी स्तर सुरक्षित नहीं है और इसका नुकसान वापस ठीक नहीं हो सकता।”

यूनिसेफ के अनुसार, 2026 में एक राष्ट्रीय स्तर का सर्वे किया जाएगा ताकि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अन्य कमजोर समूहों में लेड के प्रभाव को और अच्छे से समझा जा सके।

'पार्टनरशिप फॉर अ लेड-फ्री फ्यूचर' के डायरेक्टर अब्दुल्ला फादिल ने कहा, “लेड पॉइजनिंग बच्चों की सेहत के लिए सबसे ज्यादा रोके जा सकने वाले खतरों में से एक है। इसके असर जिंदगी भर रहते हैं, खासकर सीखने और काम करने की क्षमता पर।”

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

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