माइग्रेन की पीड़ा से हैं परेशान? योगासन है रामबाण समाधान, आयुष मंत्रालय ने दी सलाह

योग और प्राणायाम से माइग्रेन दर्द को करें प्राकृतिक तरीके से नियंत्रित
माइग्रेन की पीड़ा से हैं परेशान? योगासन है रामबाण समाधान, आयुष मंत्रालय ने दी सलाह

नई दिल्ली: विश्व योग दिवस (21 जून) करीब आ रहा है, इस मौके पर भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लगातार लोगों को योग से जुड़ने और रोगमुक्त रहने की सलाह दे रहा है। जागरुकता की कड़ी में मंत्रालय आए दिन नए-नए योगासनों के बारे में जानकारी देते हुए उससे मिलने वाले फायदे व सावधानी की सलाह भी दे रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर किए लेटेस्ट पोस्ट में मंत्रालय ने माइग्रेन की पीड़ा से छुटकारा का समाधान बताया है। मंत्रालय योग को इसका प्राकृतिक और प्रभावी समाधान बताता है। माइग्रेन एक साधारण सिरदर्द से कहीं ज्यादा गंभीर समस्या है। यह तेज दर्द अक्सर सिर के एक तरफ होता है। इसके साथ जी मिचलाना, चक्कर आना, तेज रोशनी और जोर की आवाज से परेशानी भी हो सकती है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने घंटों बैठना, गलत मुद्रा में काम करना, अनियमित नींद और लगातार तनाव माइग्रेन को बढ़ावा देते हैं। ये आदतें गर्दन, कंधे और सिर की मांसपेशियों में तनाव पैदा करती हैं, जो धीरे-धीरे माइग्रेन के दौरे को ट्रिगर कर देती हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, दवाइयों पर निर्भर रहने की बजाय नियमित योगाभ्यास लंबे समय में इस समस्या को जड़ से नियंत्रित करने में मदद करता है। योगासन को दिनचर्या में शामिल करने से शरीर की मुद्रा सही होती है, मांसपेशियां ढीली पड़ती हैं, रक्त संचार बेहतर होता है और मन को गहरी शांति मिलती है। इससे तनाव कम होता है और माइग्रेन की तीव्रता घटती है।

माइग्रेन में फायदेमंद योगासन और प्राणायाम की बात करें तो पवनमुक्तासन, भ्रामरी, मार्जरी आसन समेत कई आसन व प्राणायाम हैं, जिनके नियमित अभ्यास से माइग्रेन की समस्या को दूर किया जा सकता है।

भुजंगासन या कोबरा आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और गर्दन के तनाव को दूर करता है। पवनमुक्तासन पेट और कमर के तनाव को कम करता है, गैस और अपच से राहत दिलाता है। वहीं, मार्जरी आसन गर्दन और पीठ की अकड़न दूर करता है। ताड़ासन शरीर की मुद्रा सुधारता है और एकाग्रता बढ़ाता है। भ्रामरी प्राणायाम मन को शांत कर तनाव से होने वाले सिरदर्द में तुरंत राहत देता है और शीतली प्राणायाम शरीर को ठंडक देता है और माइग्रेन के गर्मी से जुड़े ट्रिगर्स को नियंत्रित करता है।

इन आसनों को रोजाना सुबह या शाम के समय शांत वातावरण में 15-20 मिनट अभ्यास करने से धीरे-धीरे अच्छे परिणाम दिखने लगते हैं। शुरुआत में किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना बेहतर होता है।

--आईएएनएस

 

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