लेबनान हिंसा से 7.7 लाख बच्चे मानसिक तनाव का शिकार: यूनिसेफ

नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। यूनिसेफ ने लेबनान में जारी हिंसा के बीच लाखों बच्चों की गंभीर मानसिक स्थिति की ओर दुनिया का ध्यान दिलाया है। बताया है कि हिंसा और बड़े पैमाने पर विस्थापन से करीब 7.7 लाख बच्चे मानसिक तनाव झेल रहे हैं।

आधिकारिक साइट पर जारी रिपोर्ट के अनुसार पिछले सात दिनों में हालात और भी गंभीर बन गए हैं। 17 अप्रैल 2026 को घोषित संघर्षविराम के बावजूद करीब 59 बच्चों के मारे जाने या घायल होने की रिपोर्ट सामने आई है।

लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, संघर्षविराम के बाद अब तक 23 बच्चों की मौत हो चुकी है और 93 घायल हुए हैं। वहीं 2 मार्च से अब तक कुल 200 बच्चों की जान जा चुकी है और 806 बच्चे घायल हुए हैं।

इसका मतलब है कि औसतन हर दिन लगभग 14 बच्चे या तो मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं, जो स्थिति की भयावहता को दर्शाता है।

यूनिसेफ ने कहा कि ये बच्चे लगातार हिंसा, अपनों को खोने और बार-बार घर छोड़ने की मजबूरी जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। इससे उनके मन पर गहरा असर पड़ रहा है, जो आने वाले कई वर्षों तक बने रह सकता है।

यूनिसेफ के मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका के क्षेत्रीय निदेशक एडुआर्ड बेइगबेडर ने कहा, "यदि तुरंत मदद नहीं पहुंचाई गई, तो इस संकट के मानसिक घाव बच्चों के साथ कई साल तक रह सकते हैं। इसका असर सिर्फ उनकी जिंदगी पर नहीं, बल्कि देश के भविष्य- दोनों पर पड़ेगा।"

उन्होंने खेद जताते हुए कहा, "जिन बच्चों को अब स्कूल लौटकर सामान्य जीवन जीना चाहिए, दोस्तों के साथ खेलना चाहिए और डर के माहौल से बाहर निकलना चाहिए, वे आज हिंसा में मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं।"

यूनिसेफ की रिपोर्ट अनुसार, बच्चों और उनके केयर गिवर्स (देखभाल करने वालों) में गंभीर मानसिक तनाव और शोक से जुड़े लक्षण सामने आ रहे हैं। इनमें अत्यधिक डर और चिंता, बुरे सपने, नींद न आना और भविष्य को लेकर निराशा जैसी समस्याएं शामिल हैं।

संस्था की रिपोर्ट कहती है कि अगर सुरक्षित माहौल में मानसिक स्वास्थ्य और मनो-सामाजिक सहायता (साइकोसोशल सपोर्ट) उपलब्ध नहीं कराई गई, तो ये बच्चे स्थायी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ सकते हैं।

संगठन के 2025 के "चाइल्ड-फोकस्ड रैपिड असेसमेंट (सीएफआरए)" में पहले ही यह पाया गया था कि 2024 में सैन्य तनाव बढ़ने के बाद बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य में तेज गिरावट आई है। इस अध्ययन के मुताबिक, 72 फीसदी देखभाल करने वालों ने बताया कि ये बच्चे "चिंतित या घबराए हुए थे" जबकि 62 फीसदी ने कहा कि बच्चे उदास या अवसादग्रस्त महसूस कर रहे थे।

यूनिसेफ का कहना है कि लगातार जारी हिंसा और अस्थिरता ने इन प्रभावों को और गहरा कर दिया है, जिससे बच्चों को उबरने के लिए न तो समय मिल पा रहा है, न सुरक्षित वातावरण और न ही पर्याप्त सहायता।

--आईएएनएस

केआर/

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