जन विश्वास बिल से स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा, सरकार ने गिनाए फायदे

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों से पारित जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2026 को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।

मंत्रालय के अनुसार, इस विधेयक के तहत 23 मंत्रालयों द्वारा संचालित 79 केंद्रीय कानूनों की 784 धाराओं में संशोधन किया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में यह बदलाव खासतौर पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940; फार्मेसी एक्ट, 1948; फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006; क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010; और नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशंस एक्ट, 2021 जैसे महत्वपूर्ण कानूनों में किया गया है।

सरकार का कहना है कि इन सुधारों का उद्देश्य नियमों को सरल बनाना है, जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा को मजबूत बनाए रखना भी सुनिश्चित किया गया है।

विधेयक की एक प्रमुख विशेषता छोटे प्रक्रियागत उल्लंघनों के लिए जेल की सजा को खत्म कर उसकी जगह चरणबद्ध आर्थिक दंड लागू करना है। हालांकि, गंभीर मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत कई प्रावधानों में संशोधन कर जेल की सजा की जगह आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है और एक व्यवस्थित निर्णयन (एडजुडिकेशन) तंत्र लागू किया गया है। इससे छोटे उल्लंघनों- जैसे दस्तावेजों का रखरखाव न करना या जानकारी समय पर न देना, का निपटारा अदालत के बजाय प्रशासनिक स्तर पर हो सकेगा।

पहली बार केंद्र और राज्य सरकारों को निर्णायक प्राधिकारी नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है। इसके तहत कारण बताओ नोटिस, व्यक्तिगत सुनवाई और अपील की स्पष्ट व्यवस्था भी की गई है।

मंत्रालय का कहना है कि इससे अदालतों पर बोझ कम होगा, मुकदमों की संख्या घटेगी और छोटे मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। खासतौर पर कॉस्मेटिक्स उद्योग को इससे राहत मिलेगी, क्योंकि छोटे तकनीकी उल्लंघनों पर लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सकेगा।

फार्मेसी एक्ट, 1948 में संशोधन कर दंड प्रावधानों को आधुनिक बनाया गया है और गैर-अनुपालन पर आर्थिक जुर्माने बढ़ाए गए हैं, जिससे जवाबदेही बढ़ेगी।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत प्रावधानों को इस तरह संशोधित किया गया है कि दंड अपराध की गंभीरता के अनुरूप हो, जिससे निगरानी और अनुपालन के बीच संतुलन बना रहे।

क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010 में भी संशोधन कर ऐसे मामलों में आर्थिक दंड पर जोर दिया गया है, जहां कमी से मरीजों की सुरक्षा को तत्काल खतरा नहीं होता।

वहीं, नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशंस एक्ट, 2021 को भी मजबूत किया गया है ताकि पेशेवर मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके और उल्लंघनों पर संतुलित दंड लागू किया जा सके।

सरकार के मुताबिक, इन सभी सुधारों से अलग-अलग कानूनों में एकरूपता आएगी, नियमों का पालन आसान होगा और स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले सभी हितधारकों को स्पष्टता मिलेगी।

--आईएएनएस

डीएससी

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