हाथ में दर्द से चेहरा पीला पड़ने तक, हार्ट अटैक के इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। दिल से जुड़ी बीमारियां आज तेजी से बढ़ रही हैं और हार्ट अटैक के मामले भी पहले के मुकाबले अधिक देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक अक्सर अचानक आता हुआ नजर आता है, लेकिन कई बार शरीर पहले से कुछ संकेत देने लगता है। यदि इन लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए और तुरंत इलाज शुरू कर दिया जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लोगों को हार्ट अटैक के शुरुआती संकेतों के प्रति जागरूक रहना बेहद जरूरी है। हार्ट अटैक का सबसे सामान्य लक्षण सीने में दर्द, दबाव या जकड़न महसूस होना है। कई बार यह दर्द केवल सीने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हाथों, विशेष रूप से बाएं हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े, पीठ या कोहनी तक भी फैल सकता है। कुछ लोगों को सांस लेने में परेशानी या अचानक सांस फूलने की शिकायत भी हो सकती है। इसके अलावा, मतली, उल्टी, पेट में बेचैनी और असामान्य थकान जैसे संकेत भी हार्ट अटैक का इशारा हो सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि चक्कर आना, शरीर में कमजोरी महसूस होना, बिना किसी मेहनत के ठंडा पसीना आना और चेहरे का पीला पड़ना भी गंभीर संकेत माने जाते हैं। कई मामलों में महिलाओं और बुजुर्गों में ये लक्षण सामान्य रूप से दिखाई नहीं देते, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। यदि इनमें से कोई भी परेशानी पांच मिनट से अधिक समय तक बनी रहे तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

हालांकि, ऐसा नहीं है कि इस समस्या का समाधान नहीं है। हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है। रोजाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करने से हृदय स्वस्थ रहता है। भोजन में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा वाले खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए। वहीं तले-भुने और अधिक नमक व चीनी वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए।

विशेषज्ञ धूम्रपान छोड़ने, शराब का सीमित सेवन करने और वजन नियंत्रित रखने की भी सलाह देते हैं। साथ ही ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की नियमित जांच करवाना जरूरी है। तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान और पर्याप्त नींद भी लाभदायक मानी जाती है। खासतौर पर 30 वर्ष की आयु के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना हृदय संबंधी जोखिमों को समय रहते पहचानने में मदद कर सकता है।

--आईएएनएस

एमटी/एएस

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