डच क्रूज शिप पर हंटावायरस के दूसरे मामले की पुष्टि, कुल संक्रमित लोगों की संख्या दो हुई

हेग, 5 मई (आईएएनएस)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पुष्टि की है कि अटलांटिक महासागर में एक जहाज पर हंटावायरस संक्रमण का दूसरा मामला मिला है। इसके साथ ही जहाज पर कुल संक्रमित लोगों की संख्या दो हो गई है। यह जानकारी डच क्रूज़ शिप ऑपरेटर 'ओशनवाइड एक्सपीडिशंस' ने एक बयान में दी।

कंपनी के अनुसार, नया मामला एक डच महिला यात्री का है, जिसकी 27 अप्रैल को मौत हो गई। इससे पहले एक डच दंपत्ति और एक जर्मन नागरिक की भी मौत हो चुकी है। इसके अलावा जहाज के दो क्रू सदस्य बीमार हैं। करीब 150 लोग अभी भी जहाज पर मौजूद हैं। एक और संक्रमित यात्री, जो ब्रिटेन का नागरिक है, जहाज छोड़कर दक्षिण अफ्रीका के जोहानेसबर्ग में आईसीयू में इलाज करा रहा है।

सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने बताया कि जहाज पर दो क्रू सदस्य अभी भी सांस से जुड़ी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें एक की हालत हल्की और दूसरे की ज्यादा गंभीर है। दोनों को तुरंत इलाज की जरूरत है। ये दोनों क्रू सदस्य ब्रिटेन और नीदरलैंड के नागरिक हैं। अभी तक किसी और में लक्षण नहीं मिले हैं।

हंटावायरस ऐसे वायरसों का समूह है, जो आमतौर पर चूहों जैसे रोडेन्ट्स में पाया जाता है और इंसानों में गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है। यह संक्रमण आमतौर पर संक्रमित चूहों या उनके पेशाब, मल या लार के संपर्क में आने से फैलता है। इंसान से इंसान में इसका फैलना बहुत कम होता है।

यह वायरस तब फैलता है जब कोई व्यक्ति संक्रमित चूहों के पेशाब, मल या लार को छूता है या उनसे दूषित सतह के संपर्क में आता है। अक्सर यह तब होता है जब लोग ऐसे स्थानों की सफाई करते हैं, जहां चूहों का ज्यादा प्रकोप होता है। गांवों, जंगलों, खेतों और फार्म जैसे इलाकों में यह बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि वहां चूहों की संख्या अधिक होती है।

हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम से होने वाली बीमारी (एचपीएस) में शुरुआत में सिरदर्द, चक्कर आना, ठंड लगना, बुखार और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं। इसके साथ ही उल्टी, दस्त, जी मिचलाना और पेट दर्द जैसी पेट से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। बाद में अचानक सांस लेने में दिक्कत और ब्लड प्रेशर गिरने जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है।

इस बीमारी के लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 2 से 4 हफ्ते बाद दिखते हैं। हालांकि कुछ मामलों में यह लक्षण एक हफ्ते के भीतर भी आ सकते हैं, जबकि कभी-कभी 8 हफ्ते बाद तक भी सामने आ सकते हैं।

--आईएएनएस

एएस/

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