भारत ने तंजानिया भेजा दो टन मेडिकल सामान

दार एस सलाम, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत ने तंजानिया की राजधानी स्थित श्री हिंदू मंडल अस्पताल को दो टन मेडिकल सहायता सामग्री भेजी है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवीय सहायता के प्रति नई दिल्ली की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

दार एस सलाम में मौजूद भारतीय उच्चायोग के अनुसार, सोमवार (स्थानीय समय) को मिशन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान औपचारिक रूप से यह सामान सौंपा गया। भारतीय उच्चायुक्त विश्वदीप डे ने श्री हिंदू मंडल अस्पताल के ट्रस्टी कौशिक एल. रामैया को दवाओं की खेप सौंपी।

उच्चायोग ने बताया, "यह व्यापक योगदान अस्पताल की जांच और इलाज की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, सक्शन यूनिट, ऑक्सीमीटर, माइक्रोस्कोप और स्टेथोस्कोप सहित कई महत्वपूर्ण उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा, इस खेप में इनहेलर, सिरिंज, जांच के लिए दस्ताने, पट्टियां और व्हीलचेयर जैसी तत्काल चिकित्सकीय जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में सामान भी शामिल है, जिससे मरीजों की देखभाल और आवाजाही से जुड़ी सेवाओं में समग्र सुधार सुनिश्चित होता है।"

समारोह के दौरान, डे ने इस बात पर जोर दिया कि यह कदम भारत और तंजानिया के बीच गहरी दोस्ती की पुष्टि करता है। उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने और जीवन बचाने वाली तकनीक तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के साझा संकल्प पर भी जोर दिया।

श्री हिंदू मंडल अस्पताल की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए, कौशिक एल. रामैया ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले ये उपकरण और सामग्री दैनिक मिशन में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करेंगे।

भारतीय उच्चायोग ने कहा, "यह साझेदारी हमारे स्थायी द्विपक्षीय संबंधों और इस क्षेत्र के भीतर स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के सामूहिक प्रयास का प्रमाण है।"

भारत समय-समय पर तंजानिया की मदद करता रहा है। भारतीय उच्चायोग के अनुसार, 10 फरवरी को भारत सरकार ने श्री हिंदू मंडल अस्पताल को 120 मिलियन से अधिक तंजानियाई शिलिंग (4,345,590 रुपये) मूल्य के महत्वपूर्ण जीवन रक्षक उपकरण भेंट किए थे। इन उपकरणों में तीन कार्डियक मॉनिटर, दो मैकेनिकल वेंटिलेटर, छह इन्फ्यूजन पंप और तीन सिरिंज पंप शामिल थे।

भारत और तंजानिया के बीच पारंपरिक रूप से घनिष्ठ, मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध रहे हैं। 1960 के दशक से लेकर 1980 के दशक तक, दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों में उपनिवेशवाद-विरोध, गुटनिरपेक्षता और 'दक्षिण-दक्षिण सहयोग' को लेकर साझा प्रतिबद्धताएं शामिल थीं, और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देशों के संबंध घनिष्ठ रहे।

--आईएएनएस

केआर/

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