देहरादून (दैनिक हाक): पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान महाविद्यालय, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर में वन हेल्थ सपोर्ट यूनिट, पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी), भारत सरकार, चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान (सीसीएसएनआईएएच) बागपत और पशुपालन विभाग, उत्तराखंड द्वारा संयुक्त रूप से यूएस नगर और नैनीताल के वन गुर्जर समुदाय के सदस्यों के लिए दो दिवसीय (30 और 31 अगस्त) टीकाकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) के वित्तीय सहयोग और कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री के कार्यान्वयन भागीदार के रूप में भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) द्वारा उत्तराखंड और कर्नाटक में वन हेल्थ प्रोजेक्ट के प्रारंभिक अध्ययन के रूप में आयोजित किया गया था।

वन हेल्थ एक बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण है जो मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य और इन तीन तत्वों की परस्परता और परस्पर-निर्भरता को ध्यान में रखता है। वन गुर्जर उत्तराखंड की खानाबदोश जनजातियाँ हैं, जो जंगल के किनारे के इलाकों में रहती हैं और आमतौर पर गर्मी के मौसम में प्रवास करती हैं और इसलिए, वनों और मनुस्यो के बीच तीव्र और निरंतर संपर्क में रहती है। वन गुर्जर समुदाय के द्वारा पाली गयी भैंसे आमतौर पर जंगली जानवरों और वन गुर्जरों के निकट संपर्क में रहने से संक्रामक (जूनोटिक सहित) रोगों के लिए दोतरफा वाहक के रूप में जोखिम वहन करती हैं। उत्तराखंड में वन हेल्थ के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, जूनोटिक रोगों के लिए वन गुर्जर समुदाय की जागरूकता और आवश्यकता को संबोधित करना महत्वपूर्ण है। इसलिए, टीकाकरण और कृमिनाशन के बारे में जागरूकता पैदा करने और राज्य के टीकाकरण अभियान को व्यापक रूप से बढ़ावा देने के लिए; नैनीताल के वैन गुर्जर समुदाय के सदस्यों के लिए 30-08-2022 को पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान महाविद्यालय, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर में टीकाकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। प्रशिक्षण कार्यक्रम में वन गुर्जर आदिवासी युवा संगठन के संस्थापक श्री अमीर हमजा सहित नैनीताल जिले के कुल 28 वन गुर्जर सदस्यों ने भाग लिया। प्रो. (डॉ.) एन एस जादोन, डीन, सीवीएएस, जीबीपीयूए एंड टी ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में डॉ अजीत सिंह यादव, निदेशक, सीसीएसएनआईएएच, बागपत; डॉ विकास गुप्ता, सहायक निदेशक, सीसीएसएनआईएएच; डॉ निहार नलिनी मोहंती, सहायक निदेशक, सीसीएसएनआईएएच; डॉ भूपेंद्र जंगपांगी, सीवीओ, नैनीताल, डॉ शिव प्रसाद, प्रोफेसर वीजीओ, जीबीपीयूए एंड टी; डॉ राजीव रंजन, सहायक प्रोफेसर, जीबीपीयूए एंड टी उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न सत्र शामिल थे, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा टीकाकरण, कृमिनाशन और जानवरों में टैगिंग के महत्व, टीकाकरण सारणी का पालन, पशु का टीकाकरण करते समय बरती जाने वाली सावधानियां, जैव सुरक्षा के महत्व, पशु रोगों की रोकथाम आदि पर प्रकाश डालते हुए संवादात्मक व्याख्यान दिए गए । प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर प्रशिक्षुओं की शंकाओं को दूर करने के लिए वन हेल्थ सपोर्ट यूनिट के परियोजना निदेशक डॉ. आरके सिंह द्वारा प्रश्न-उत्तर और प्रतिक्रिया सत्र का संचालन किया गया।

वन हेल्थ पायलट की अन्य पहलों को आगे बढ़ाते हुए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम वन गुर्जर समुदाय के बीच पशुओं को टैग करने और टीकाकरण करने की प्रथा को बढ़ाकर संक्रामक रोगों की संभावना को और कम करेगा और उनके बीच जूनोटिक और नॉन -जूनोटिक रोगों की घटना को कम करने के लिए डीएएचडी द्वारा की गई पहलों के बारे में जागरूकता पैदा करके उन्हें मुख्यधारा से जोड़ेगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम 30 और 31 अगस्त, 2022 को नैनीताल और यूएस नगर जिले के वन गुर्जर समुदाय के सदस्यों के लिए दो बैचों में आयोजित किया जाना निर्धारित किया गया है। राज्य के लिए निकट भविष्य में ऐसे कई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।






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