नयी दिल्ली: लोकसभा में कुछ विपक्षी दलों के नेताओं ने बुधवार को कांग्रेस के चार सदस्यों के निलंबन को वापस लेने की मांग की, वहीं सरकार ने उनसे आगे सदन में विपक्षी सदस्यों द्वारा तख्तियां नहीं दिखाये जाने की जिम्मेदारी लेने को कहा।


राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सुप्रिया सुले ने कांग्रेस के चार निलंबित सदस्यों को सदन में वापस बुलाये जाने का अनुरोध करते हुए कहा कि विपक्षी दल सदन में चर्चा करना चाहते हैं और सरकार के साथ सहयोग करना चाहते हैं।


उन्होंने कहा, ‘‘हम विपक्ष की ओर से यह विनती करते हैं। हम आसन के समीप नहीं आएंगे। मैं, सभी की तरफ (विपक्ष) से बोल रही हूं। हम सदन चलाना चाहते हैं।’’


सदन में विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए तख्तियां दिखाने और आसन के प्राधिकारों की उपेक्षा करने के मामले में सोमवार को कांग्रेस सदस्यों मणिकम टैगोर, टी एन प्रतापन, जोतिमणि और राम्या हरिदास को संसद के मॉनसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया था।


निचले सदन में आज तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि सदन की भावना है कि इन सदस्यों का निलंबन वापस लिया जाए।


उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि सरकार महंगाई पर चर्चा के लिए तैयार है। बंदोपाध्याय ने कहा कि विपक्ष भी चर्चा में भाग लेने को तैयार है।


द्रमुक नेता ए राजा ने कहा कि सदन में आसन के पास आना, लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करना और तख्तियां दिखाना नई बात नहीं है। उन्होंने कांग्रेस सांसदों के निलंबन के फैसले को वापस लेने का आग्रह करते हुए कहा कि इसके बाद चर्चा शुरू हो सकती है।


संसदीय कार्य मंत्री जोशी ने कहा कि सरकार सर्वदलीय बैठक से लेकर आज सुबह तक विपक्ष की मांग पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कहती आ रही है।


उन्होंने कहा, ‘‘इन लोगों (विपक्ष) ने पिछले सप्ताह को बर्बाद कर दिया। अभी भी वही हो रहा है। वे चर्चा चाहते हैं तो हम तैयार हैं। लेकिन क्या वे गारंटी लेंगे कि उनके सदस्य फिर से आसन के समीप नहीं आएंगे, तख्तियां नहीं दिखाएंगे।’’


उन्होंने कहा कि जब भाजपा विपक्ष में थी तो उसके सदस्य आसन के समीप आकर प्रदर्शन करते थे लेकिन मर्यादा का ध्यान रखा जाता था। जोशी ने कहा कि लेकिन पिछले कुछ दिन से विपक्ष के सांसद तख्तियां दिखा रहे हैं और लोकसभा अध्यक्ष के चेहरे के सामने तख्ती लाई जाती हैं।


इस दौरान आसन पर पीठासीन सभापति रमा देवी उपस्थित थीं।

—भाषा



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