नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वक्फ एक्ट को खत्म करने का सबसे ज्यादा फायदा वक्फ की संपत्ति पर अवैध जबरन कब्जा करने वालों को होगा। जस्टिस जोसफ ने याचिकाकर्ता बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय से कहा कि मुझे याचिका में लगाए गए इस इल्जाम से झटका लगा, क्यों कि आपने लिखा है कि ट्रिब्यूनल का सदस्य अपनी धार्मिक मान्यता के मुताबिक ही अपने आधिकारिक निर्णय भी करेगा। आपको याद रखना चाहिए की वक्फ वैधानिक निकाय है, लेकिन उसका सभी जमीन पर स्वामित्व नहीं है। हमें इस बारे में धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। अगर हम इस कानून को रद्द कर दें तो वक्फ चलाने वाले तो आजाद हो जाएंगे।

कोर्ट ने पूछा, क्या अनुच्छेद 139(a) के तहत ऐसी याचिकाओं पर हमारा सुनना ही जरूरी है? क्या वक्फ एक्ट में कुछ भी समानता के खिलाफ यानी गैर बराबरी वाला है? अगर आपकी इस दलील पर सुनवाई हो तो अतिक्रमण करने वाले बहुत खुश होंगे। अगर आप वक्फ एक्ट को खत्म करवा देते हैं तो जिन लोगों के पास वक्फ है, वे खुलेआम दौड़ेंगे। जो आखिरी हंसेगा वह अतिक्रमण करने वाला होगा। 

जज ने कहा कि हमारी राय है कि वक्फ अधिनियम नियमों में लाता है। आप भेदभाव का आरोप कैसे लगा सकते हैं। मुझे दुख होता है कि आपने इसे धर्म के नाम पर रखा है, हमें इससे आगे की बात करनी चाहिए। मीडिया के कुछ वर्गों में कुछ गलतफहमी के आधार पर बातचीत चल रही है। पूरी तरह से गलतफहमी, हमने हिंदू बंदोबस्ती पर राज्य कानूनों की एक सूची तैयार की है। उनके पास प्रावधान हैं जो कहते हैं कि सदस्य को हिंदू धर्म का पालन करना चाहिए।






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