नई दिल्ली: महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना में बगावत से महाविकास अघाड़ी सरकार पर संकट गहरा गया है। शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे का अपने समर्थक विधायकों के साथ बगावती सुर अपनाने से सत्ता के गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। आइए, जानते हैं इस घटनाक्रम के महाराष्ट्र की राजनीति में किस दिग्गज नेता के लिए क्या मायने हैं। शिवसेना में मतभेदों के चलते बगावत से पहली बार उपजे इतने बड़े संकट से निपटना पार्टी प्रमुख व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लिए अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ, जब उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। उद्धव के लिए यह स्पष्ट संकेत है कि पार्टी और विधायकों पर उनकी पकड़ कमजोर हुई है। इससे पार्टी में उनकी साख को भी नुकसान पहुंचा है। अब यह देखने वाली बात होगी कि उद्धव ठाकरे बगावत पर उतरे एकनाथ शिंदे और उनके समर्थकों को मनाने में सफल हो पाते हैं या नहीं शिवसेना में बगावत की चिंगारी काफी पहले से सुलग रही थी। राज्यसभा और विधान परिषद के चुनावों में इस चिंगारी को हवा मिली। महाराष्ट्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना में मतभेदों का फायदा उठाने में कामयाब रहे। यही वजह रही कि महाविकास अघाड़ी गठबंधन में क्रॉस वोटिंग की वजह से भाजपा को राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में एक-एक सदस्य अतिरिक्त मिल गए। इसे सीधे तौर पर फडणवीस की कोशिशों के सफल नतीजे से जोड़कर देखा जा रहा है। जाहिर है कि महाराष्ट्र भाजपा में उनका कद और बढ़ा है। अब यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि शिवसेना से बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे अपने समर्थकों के साथ भाजपा के पाले में आ सकते हैं। राजनीति के धुरंधर माने जाने वाले एनसीपी प्रमुख 81 वर्षीय शरद पवार की प्रतिष्ठा भी शिवसेना में बगावत से प्रभावित हुई है। अपनी पार्टी के भीतर और सहयोगी दलों की समस्याओं को सुलझाने में माहिर पवार भी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में महाविकास अघाड़ी गठबंधन के नेताओं की क्रॉस वोटिंग को रोकने में सफल नहीं हो पाए। जबकि, महाराष्ट्र में वर्ष 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन खड़ा करने में पवार ने अहम भूमिका निभाई थी। इतना ही नहीं, बल्कि एनसीपी में अजित पवार की बगावत और उनके भाजपा के साथ सरकार बनाने पर भी शरद पवार ने ऐसा दांव चला था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कुछ समय बाद ही इस्तीफा देना पड़ा था। ऑटो चालक से राजनीति में कदम रखने वाले शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने बगावती सुर अपनाकर पार्टी में अपनी ताकत का अहसास कराया है। शिवसेना नेता अनंत दिघे से करीबी के चलते एकनाथ शिंदे को पार्टी में अहमियत मिली। धीरे-धीरे पार्टी में उनका कद बढ़ता गया। मगर, कुछ मसलों पर पार्टी नेतृत्व से मतभेदों के कारण वह पिछले कुछ समय से नाराज चल रहे थे। इसका नतीजा यह रहा है कि वह पार्टी के कुछ विधायकों को साथ लेकर बगावत पर उतर आए। उनके इस कदम से राज्य की महाविकास अघाड़ी सरकार पर संकट मंडरा रहा है।



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