जी. किशन रेड्डी*


निस्संदेह जब 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने सत्ता संभाली, तो उस समय देश घोर निराशा के वातावरण से गुजर रहा था। भ्रष्टाचार चरम पर था, हर दिन कोई एक नया घोटाला सामने आता था। सामान्य जनमानस के मन में था कि अब इस देश का कुछ नहीं हो सकता। ऐसे में वर्ष 2014 के दौरान भारत की जनता को नरेंद्र मोदी में आशा की नई किरण दिखाई दी और हुआ भी वही। आज यह गर्व की बात है कि केंद्र सरकार में बीते आठ वर्षों में एक भी घोटाला नहीं हुआ। यह इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि 2014 में जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने संसद को लोकतंत्र का मंदिर मानकर माथा टेका और देश की देवतुल्य 135 करोड़ जनता के सामने प्रण लिया “ना खाऊँगा ना खाने दूंगा”। 

एक नई सोच के साथ नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभाली और उनकी नई सोच यह थी कि हमारे समक्ष विश्व गुरु भारत का लक्ष्य है और यह लक्ष्य जनभागीदारी से पूर्ण होगा। इसलिए जब हम दुनिया का नेतृत्व करने की बात करते हैं तो हमारे देश के सामान्य व्यक्ति की बुनियादी जरूरत सिर्फ रोटी, कपड़ा और मकान नहीं हो सकती, 21वीं सदी में इस सब के अलावा कनेक्टिविटी चाहिए, अच्छी शिक्षा चाहिए, चिकित्सा सुविधा चाहिए, पीने का स्वच्छ जल चाहिए, बिजली चाहिए, इंटरनेट चाहिए, शौचालय चाहिए, सुरक्षा चाहिए, सम्मान चाहिए और विकास में भागीदारी के नए अवसर चाहिए। बस इसी सोच से इस यात्रा की शुरुआत हुई, जिस प्रकार एक पिरामिड बनता है, उसी प्रकार 2014 से लगातार साल-दर-साल विश्वगुरु भारत के लक्ष्य को केंद्रित कर मोदी सरकार ने सैकड़ों योजनाओं का श्रीगणेश किया।  


सुशासन किसी भी लोकतांत्रिक देश की सबसे बड़ी ताकत होती है, इसलिए मोदी सरकार की दूरदर्शिता, पारदर्शिता, दृड़ इच्छाशक्ति, गरीब कल्याण और सेवा भाव की नई सोच के साथ “सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास और सबका प्रयास” सुशासन का मूल मंत्र बना। सुशासन की जड़ें पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय सिद्धांत पर आधारित हैं, जिसमें उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति को मिलने की बात कही है। मोदी सरकार के पिछले आठ वर्षों में, ना सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति को मिला है, बल्कि पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च सम्मान भी उन सामान्य लोगों के हाथों में आए, जो हर दृष्टि से इसके हकदार थे। यह सुशासन, सरकार के प्रति सामान्य जनमानस के मन में विश्वास को और दृढ़ करता दिखाई देता है।


यह सत्य है कि छोटी-छोटी बातों से बड़े बदलाव आते हैं। इसलिए सबसे पहले केंद्र सरकार ने उन योजनाओं पर ध्यान दिया, जिन्होंने सामान्य जन के आत्मगौरव, आत्मविश्वास और बुनियादी जरूरतों को पूरा किया। कनेक्टिविटी सबसे पहली जरूरत है, आज बड़ी बात यह है कि देश में सड़कों का जाल बिछ गया है, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, भारत माला परियोजना और पर्वत माला परियोजना के माध्यम से सारा भारत जुड़ गया है। पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों को इन आठ वर्षों में पहली बार ट्रेन का सफर करने का अवसर मिला। देश के करोड़ों लोग ऐसे थे, जिन्होंने बैंक में प्रवेश तक नहीं किया था। “जन धन योजना” के तहत लगभग 45 करोड़ देशवासियों को बैंक से जोड़ा गया। 2014 में “स्वच्छ भारत अभियान” शुरू किया तथा देश में 11 करोड़ से अधिक शौचालय बने व देश के 6 लाख से अधिक गाँव ‘खुले में शौच मुक्त’ हुए। 'उज्ज्वला योजना' के तहत देश की 9 करोड़ महिलाओं को धुएं से आजादी मिली और उन्हे गैस कनेक्शन मिला। सरकार ने नया जल शक्ति मंत्रालय बनाया और 9 करोड़ से अधिक परिवारों को पीने का स्वच्छ जल दिया। देश में 22 एम्स हॉस्पिटल का निर्माण हो रहा है तथा स्वस्थ भारत की दिशा में “आयुष्मान भारत” योजना से गरीब लोगों का पांच लाख तक मुफ्त इलाज हो रहा है। दूसरी बात कि देश के जनमानस को स्वावलंबी बनाने और उसका आत्मविश्वास बढ़ाने की दिशा में ‘मुद्रा योजना’, ‘स्किल इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘स्टार्टअप’ और ‘ग्राम उदय से भारत उदय’ जैसे अभियानों की शुरुआत हुई। हुनर हॉट जैसी गतिविधियों के जरिए देश की स्थानीय कारीगरी, कला और कौशल को उचित सम्मान मिला तथा उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। तीसरी बात यह है कि केंद्र सरकार ने ‘बेटी बचाओ -बेटी पढ़ाओ अभियान’, मुस्लिम महिलाओं को ‘तीन तलाक’ से मुक्ति और हर क्षेत्र में महिला भागीदारी सुनिश्चित करने की सकारात्मक पहल की। चौथी बात, देश में नए आर्थिक सुधार हुए जैसे- डिजिटाइजेशन और “एक राष्ट्र-एक टेक्स” जीएसटी देश के इतिहास में ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की दिशा में एक नया अध्याय था।

देश के किसान को समृद्ध करने की दिशा में भी अनेक कदम उठाए गए, केमिकल फ्री नेचुरल फार्मिंग अर्थात आर्गेनिक खेती के बल पर भारत वैश्विक बाजार में विश्व नेता बन सकता है। इसलिए ड्रोन सिस्टम, कृषि सिंचाई योजना, सॉलोर पंप, फसल बीमा, किसान सम्मान निधि, इको सिस्टम, सॉलोर पेनेल आदि सुविधा देने की नीति सामने आई है।

इसी प्रकार सैन्य शक्ति को मजबूत करते हुए ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड का पुनर्गठन किया, भारत ने लड़ाकू राफेल विमान और 48,000 करोड़ रुपये से 83 स्वदेशी तेजस विमान खरीदे। हमने दुनिया को अपनी ताकत का एहसास भी कराया, जब हमारे जवानों ने दुश्मन के घर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की तथा सुरक्षित अपने वतन लोटे। 

इन आठ वर्षों में भारत की विदेश नीति भी अभूतपूर्व रही है। अफगानिस्तान प्रकरण और यूक्रेन व रूस के बीच हो रहे युद्ध से पता चलता है कि अब भारत के रुख को न केवल विशेष महत्व दिया जा रहा है बल्कि उससे मध्यस्थता की मांग की जा रही है।


इस आठ वर्ष की यात्रा में पिछले दौ वर्षों का कालखंड ना सिर्फ भारत के लिए बल्कि दुनिया के लिए महामारी का संकट था, बड़े-बड़े विकसित देश इसकी चपेट में आने से खुद को बचा ना सके। भारत जो हजारों वर्षों के इतिहास से सीखता आया है फिर एक बार हमने इस चुनौती भरी महामारी को अवसर में बदला और “आत्मनिर्भर भारत” का संकल्प किया। वर्तमान में ‘स्टार्टअप’ और ‘वॉकल फॉर लोकल ‘ जैसे अभियानों से राष्ट्र आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहा है तथा पूरी दुनिया में राष्ट्र गौरव बढ़ रहा है। भारत ने दुनिया के सेंकड़ों देशों को “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना से वैक्सीन दी और अपने देश में महामारी के खिलाफ सबसे कम समय में 190 करोड़ टीकाकरण का इतिहास बनाया। इससे आगे अगर कहना है तो इन आठ वर्षों में यह केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और जनता का उसके प्रति अटूट विश्वास का ही प्रणाम है कि 70 वर्षों से लंबित धारा 370 हटा कर “एक राष्ट्र -एक संविधान-एक ध्वज” के सपने को पूरा किया व राम मंदिर के निर्माण जैसे सर्वाधिक विवादित माने जाने वाले विषय भी बड़ी सरलता व सौहार्दपूर्ण ढंग से निपट गए। 

15 अगस्त 2021 से भारत अपनी आजादी के 75 वर्ष में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है। आजादी के आंदोलन में जिस खादी को पहन स्वदेशी का नारा बुलंद हुआ,वह वास्तव में अब जाकर पूरा हकीकत में बदला। खादी ने पहली बार (2021-2022) एक वित्तीय वर्ष में एक लाख पन्द्रह हजार करोड़ रुपये का कारोबार किया है, जो देश में एक नया रिकॉर्ड है। आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत ने अपने 100वें यूनिकॉर्न का जन्म देखा। किसी भी स्टार्टअप के लिए यूनिकॉर्न बनना मील का पत्थर जैसी बड़ी उपलब्धि है। आज वैश्विक स्तर पर हर 10 में से 1 यूनिकॉर्न का उदय भारत में हो रहा है। यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि भारत का भारत के प्रति स्वाभिमान जागृत हुआ।

240 वर्षों के बाद काशी विश्वनाथ धाम कोरीडोर, चारधाम यात्रा, रामायण सर्किट, श्रीकृष्ण सर्किट और बुद्ध सर्किट जैसी योजना भारत की आस्था के लिए सुखद अनुभूति है। दुनिया के लोग बड़ी संख्या में भारत की विरासत का दर्शन करने आ रहे हैं क्योंकि भारत के अध्यात्म के पास विश्व के लिए सुख, शांति और कल्याण का मार्ग है। भारत के प्रधानमंत्री दुनिया के देशों में जाकर वहाँ के राष्ट्रीय अध्यक्षों को कर्म का संदेश देने वाली गीता भेंट स्वरूप देते हैं, इसी प्रकार योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत है, जिसे नरेंद्र मोदी के अथक प्रयासों के बाद वैश्विक पटल पर एक अलग पहचान मिली है निश्चित रूप से योग दुनिया को भारत की अमूल्य भेंट है। आज़ादी के अमृत महोत्सव में हमने आने वाले 25 वर्षों के लिए नए भारत की संकल्पना करते हुए नए लक्ष्य तय किए हैं। जो भारत का अमृत काल होगा और वर्तमान युवा पीढ़ी उस समय देश का नेतृत्व कर रही होगी। साढ़े तीन दशक के बाद लागू हुई ‘नई शिक्षा नीति’ और ‘सेंट्रल विस्टा’ बनाने जैस साहसी निर्णय भी मोदी सरकार की दूरदृष्टी का उदाहरण हैं। आज जब ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ में केंद्र सरकार अपने आठ वर्ष पूरे कर रही है तो यही ध्यान में आता है कि “राष्ट्रभक्ति ले हृदय में हो खड़ा यदि राष्ट्र सारा तो संकटों को मात देकर राष्ट्र विजयी हो हमारा”।

—दैनिक हाक



*जी. किशन रेड्डी, भारत सरकार के संस्कृति,पर्यटन एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री हैं।



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