जम्मू: जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में एक कश्मीरी पंडित की आतंकवादियों हत्या किए जाने के बाद, कश्मीरी पंडित पंडितों का गुस्सा सातवें आसमान पर है इस समुदाय के सदस्य विरोध करने के लिए केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सड़कों पर उतर आए है। मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में स्थित एक सरकारी कार्यालय में घुसकर लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों ने एक कश्मीरी पंडित कर्मचारी की गोली मारकर हत्या कर दी। जिस कश्मीरी पंडित की हत्या की गयी उसका नाम राहुल भट (35) था और वह चादूरा के तहसील कार्यालय में प्रवासी कश्मीरी पंडितों के रोजगार के लिए दिए गए विशेष पैकेज के तहत तैनात थे। बंदूक की नौंक पर आतंकी जबरन घुसे और उन्हें राहुल पर गोलिया चला दी। गोली लगने के बाद उन्हें तुरंत श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि शाम करीब चार बजकर 30 मिनट पर लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादी तहसील कार्यालय में दाखिल हुए और भट को गोली मार दी। उस समय कार्यालय कर्मचारियों से भरा हुआ था। उन्होंने कहा कि भट बडगाम के शेखपुरा स्थित प्रवासी कॉलोनी में रहते थे और आठ साल से सरकारी सेवा में थे। उनके परिवार में पत्नी, पांच साल बेटी और माता-पिता हैं।

जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में एक कश्मीरी पंडित की आतंकवादियों द्वारा हत्या किए जाने के बाद, कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्य विरोध करने के लिए केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सड़कों पर उतर आए है। प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार शाम वेसु गांव के पास श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया। विरोध के एक वीडियो में लोगों को 'हमें न्याय चाहिए' के नारे लगाते हुए सुना जा सकता है। समुदाय ने अनंतनाग जिले के मट्टन ट्रांजिट कैंप और बडगाम के चदूरा में भी विरोध प्रदर्शन किया, जहां यह घटना हुई थी। कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों, जो घाटी में सेवा कर रहे हैं, ने भी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और कहा कि वह अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है। शुक्रवार सुबह 10 बजे उपराज्यपाल के आवास के बाहर धरना प्रदर्शन किया गया है। प्रदर्शन कर रहे कश्मीरी पंडितों ने सरकार से गुहार लगाई है कि हमारी केवल एक मांग है- या तो हमें सुरक्षा प्रदान करें या फिर हमें बंदूक और उसका लाइसेंस दें या हमें जम्मू स्थानांतरित करें। कोई अन्य मांग नहीं। हम कुत्तों और बिल्लियों की तरह नहीं मर सकते, हम इंसान हैं, एक संदेश प्रसारित किया जा रहा है।

इस घटना की विभिन्न कर्मचारी संगठनों और राजनीतिक दलों ने निंदा की है। राहुल भट बडगाम के शेखपुरा स्थित प्रवासी कॉलोनी में रहते थे और आठ साल से सरकारी सेवा में थे। उनके परिवार में पत्नी, पांच साल बेटी और माता-पिता हैं। उनके पिता पुलिस अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हैं। भट गत सात महीने में दूसरे कश्मीरी पंडित हैं जिनकी हत्या आतंकवादियों द्वारा की गई है। इससे पहले प्रमुख दवा कारोबारी माखन लाल बिंदरु की छह अक्टूबर 2021 को आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। अगस्त 2019 से लेकर मार्च 2022 के बीच जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों सहित कुल 14 अल्पसंख्यक हिंदुओं की हत्या आतंकवादियों द्वारा की गई है। आतंकवादियों द्वारा जिन लोगों को निशाना बनाया गया है उनमें कश्मीर के विभिन्न हिस्सों के प्रमुख कारोबारी, सरपंच और ब्लॉक विकास परिषद के सदस्य शामिल हैं। गौरतलब है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के बाद से कश्मीर में गैर मुस्लिमों और बाहर से आए लोगों पर हमले बढ़े हैं। भट की हत्या पर प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा, ‘यह दुखद घटना है लेकिन मैं आश्वस्त करता हूं कि हमने हत्यारों की पहचान कर ली है। इनमें से एक श्रीनगर में पूर्व में हुई हत्या में भी शामिल था जबकि दूसरा आतंकी नया भर्ती है।’ कम ज्ञात संगठन कश्मीर टाइगर्स ने भट की हत्या की जिम्मेदारी ली है लेकिल पुलिस प्रमुख का कहना है कि इसके पीछे लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है। 

भट की हत्या की खबर फैलते ही शेखपुरा कॉलोनी में रह रहे प्रवासी कश्मीरी पंडितों ने प्रदर्शन किया। कश्मीर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार कॉलोनी पहुंचे और लोगों को समझाने की कोशिश की।दक्षिण कश्मीर के मट्टल और वेसू में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने भी हत्या के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।




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