पटना: राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कहा है कि शराबबंदी अभियान पूरी तरह विफल रहा और अहम का विषय बनाए बिना इसकी समीक्षा की जरूरत है। पूरे राज्य में दो अक्टूबर से जन सुराज अभियान के तहत अपनी 3500 किलोमीटर की पद यात्रा की तैयारी के लिए चंपारण में मौजूद किशोर ने यह भी कहा कि 13 सितंबर को नीतीश कुमार से मुख्यमंत्री आवास पर उनकी मुलाकात हुई थी और यह सामाजिक और राजनीतिक तौर पर एक शिष्टाचार मुलाकात थी। किशोर ने कहा, ‘‘नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं, मैं मई से बिहार में काम कर रहा हूं। तब से कई बार मिलने की बात हुई लेकिन मैं नहीं मिल पाया था। इसलिए शिष्टाचार के नाते मेरी उनसे मुलाकात हुई है।''

जन सुराज अभियान के भविष्य और नीतीश कुमार के साथ जाने पर किशोर ने कहा, ‘‘जन सुराज अभियान और बिहार की बदहाली पर उनके रुख में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।'' आईपैक के संस्थापक किशोर ने कहा कि जो रास्ता उन्होंने खुद के लिए तय किया है वह उस रास्ते पर कायम हैं। बेगूसराय में हुई गोलीबारी की घटना के बारे में पूछे जाने पर किशोर ने कहा, ‘‘ऐसी घटनाओं से लोगों की जो आशंकाएं हैं, उसको बल मिलता है। कानून व्यवस्था को लेकर लोगों के मन में जो डर है वो सही साबित हो रहा है।‘‘ 

किशोर ने कहा, ‘‘लेकिन यह रातोंरात नहीं हुआ है। बीजेपी के सत्ता में रहने के दौरान भी कानून-व्यवस्था बिगड़ रही थी हालांकि इस मामले को अभी उठाना उनके लिए सुविधाजनक हो सकता है।'' मुख्यमंत्री के सलाहकार रह चुके किशोर ने कहा कि बिहार में प्रशासन का एक बड़ा हिस्सा शराबबंदी में लगा हुआ है इसलिए सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है और शराबबंदी लागू होने के बाद पिछले कुछ सालों में प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी है। उन्होंने कहा कि इस सरकार के मुखिया और गृहमंत्री नीतीश कुमार हैं इसलिए ये उनकी जिम्मेवारी है।

किशोर ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ बिहार में जमीन पर चार-पांच महीने के अपने अनुभव को साझा किया और बताया कि कैसे शराबबंदी जमीन पर प्रभावी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनसे कहा कि बिना अहम का विषय बनाए इसकी समीक्षा की जरूरत है।''कुमार के महागठबंधन के साथ जाने का कोई देशव्यापी असर नहीं होने के अपने पुराने बयान पर कायम किशोर ने यह भी कहा कि सात दलों के महागठबंधन को जनता की आकांक्षओं को पूरा करने के लिए 10 लाख सरकारी नौकरियों जैसे वादों को पूरा करने की आवश्यकता है।



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