निर्मल रानी*

हालांकि स्वतंत्रता दिवस आने में अभी तीन माह से भी अधिक समय बचा है परन्तु रेल मंत्रालय ने अभी से आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर मनाये जा रहे आज़ादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत ‘हर घर झंडा’ के नाम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। 15 अगस्त 2022 की स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए घर घर तिरंगा फहराने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत देश के लगभग 10 लाख रेल कर्मचारियों के आवासों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की तैयारी की जा रही है। ख़बरों के अनुसार रेलवे बोर्ड के निदेशक इस्टेबलिशमेंट (जनरल) हरीश चंद्र ने सभी रेलवे ज़ोन के महाप्रबंधक, आरडीएसओ, मेट्रो व सेंट्रेलाईज़्ड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट को एक पत्र लिखकर इस अभियान को सभी रेलकर्मियों तक पहुंचाने का निर्देश जारी किया है। उन्होंने अपील की कि रेलकर्मी ऐसा करने के साथ ही अपने आसपास के लोगों को भी घरों पर तिरंगा झंडा लगाने के लिए प्रेरित करें। गोया रेल मंत्रालय स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार तिरंगे के माध्यम से देश के लोगों में राष्ट्रवाद की भावना का संचार करने के लिये युद्ध स्तर पर तिरंगा फहराओ अभियान छेड़ने जा रहा है।

                                ऐसे में यह ज़रूरी है कि रेल मंत्रालय की प्राथमिकताओं पर भी नज़र डाली जाये कि आख़िर रेल विभाग के लिये सबसे ज़रूरी कर्तव्य क्या हैं । रेल यात्रियों की बढ़ती संख्या के चलते आम तौर पर रेल गाड़ियों में लगने वाले डिब्बों की संख्या पहले से काफ़ी अधिक कर दी गयी है। कोई कोई लंबी दूरी की गाड़ियां तो लगभग एक किलोमीटर तक लंबी होने लगी हैं। यानी इंजन के सिग्नल के पास खड़े होने के बाद गाड़ी के पिछले कई डिब्बे प्लेटफ़ॉर्म के पीछे ही रह जाते हैं। तमाम स्टेशन ऐसे हैं जहाँ प्लेटफ़ॉर्म की लंबाई बढ़ाई भी गयी हैं परन्तु अभी भी सैकड़ों स्टेशन ऐसे हैं जहाँ प्लेटफ़ॉर्म छोटे होने के चलते पूरी ट्रेन प्लेटफ़ॉर्म पर नहीं खड़ी हो पाती। नतीजतन प्लेटफ़ॉर्म से दूर खड़े डिब्बों पर चढ़ने उतरने वाले यात्रियों को अपने सामान के साथ पत्थर बजरी पर उतरने में काफ़ी परेशानी उठानी पड़ती है। ख़ासकर बुज़ुर्गों व महिलाओं को। लिहाज़ा रेल विभाग को तिरंगा अभियान की ही तरह पूरे देश के रेलवे प्लेटफ़ॉर्म का ज़रुरत के अनुसार विस्तारण करने का अभियान भी चलाना चाहिये।   


                                 ट्रेन के डिब्बों में मच्छरों के प्रकोप आम बात है। कभी कभी तो चूहे भी यात्रियों के साथ ट्रेन यात्रा करने आ जाते हैं। इन सबका कारण केवल यही है कि डिब्बों के भीतर समुचित सफ़ाई नहीं हो पाती। इसतरह की गंदिगी से बीमारी फैलने की भी संभावना बनी रहती है। टॉयलट में गंदिगी रहती है। ए सी श्रेणी में हैंड वाश की शीशी होती है मगर ख़ाली। ख़ासतौर पर आज के कोरोना संक्रमण काल में जबकि सरकार द्वारा विशेष व श्रमिक स्पेशल ट्रेन के नाम पर रेल भाड़े में वृद्धि की जा चुकी है। तमाम तरह की सुविधायें बंद की जा चुकी हैं। ऐसे में प्रत्येक यात्री डिब्बों का स्वच्छ व सेनिटाइज़ होना भी बहुत ज़रूरी है। स्वच्छ भारत अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में रेल विभाग को इस ओर भी ज़रूर ध्यान देना चाहिये। यात्रियों की सुरक्षा भी रेल विभाग की ज़िम्मेदारी है। प्रायः चोर उचक्के तत्व बिना समुचित टिकट लिये किसी भी डिब्बे में सवार हो जाते हैं। ख़ासकर देर रात यह काले कारनामे घटित होते हैं। और यही अवांछनीय तत्व सोते हुये यात्रियों का सामान उठाकर चंपत हो जाते हैं। यही लोग यात्रियों को ज़हर खुरानी का शिकार भी बनाते हैं। इसके अतिरिक्त दशकों से रेलवे स्टेशन बाबा रुपी भिखारियों,चोर उचक्कों ,नशेड़ियों व अवांछनीय तत्वों का प्रश्रय स्थल और जुर्म का अड्डा बना हुआ है। भगवा कपड़े पहन कर तमाम आवारा क़िस्म के लोग बेरोकटोक ट्रेन में यात्रा करते हैं। सरे आम बीड़ियाँ व सिगरेट फूंकते हैं। सीटों से लेकर डिब्बों के प्रवेश द्वारा पर या डिब्बे में आवागमन के रास्ते में बैठकर ये लोग गंदिगी फैलाते हैं। परन्तु रेलवे पुलिस हो या रेल में चलने वाला स्टाफ़ कोई भी इन्हें ट्रेन से न तो उतारता है न ही जुरमाना वसूलता है। यह लोग भी ट्रेन को अपनी पैतृक संपत्ति समझकर यात्रा करते हैं। परन्तु यदि कोई ग़रीब मजबूर रेल यात्री किसी मजबूरी वश बेटिकट यात्रा कर रहा हो तो उसे जेल भी जाना पड़ सकता है। इस दोहरी व लचर व्यवस्था से भी रेलवे का मु                     सफ़ाई व सुरक्षा की ही तरह रेल यात्रियों को शीतल व सादा पेय जल उपलब्ध कराना भी रेल विभाग की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है। दशकों से यह देखा जा रहा है कि महानगरों के रेलवे स्टेशन के अतरिक्त देश के अधिकांश स्टेशन पर पीने के पानी की आपूर्ति प्रायः ठप ही रहती है। कहा तो यह भी जाता है कि कहीं कहीं स्टेशन स्टॉफ़ और वेंडर्स की मिली भगत से यह 'पाप ' किया जाता है ताकि पानी की टूंटियों या कूलर से पानी न मिलने की वजह से प्यासे रेल यात्री प्लेटफ़ॉर्म व वेंडर्स से पानी की बोतल या कोल्ड ड्रिंक्स आदि ख़रीदने के लिये बाध्य हों।यह कितना बड़ा पाप व अधर्म है। रेल विभाग का दायित्व तो यह है कि जिन प्लेटफ़ॉर्म की लंबाई बढ़ाई गयी है वहां प्लेटफ़ॉर्म के शुरू से अंत तक पानी की टूंटियों का विस्तारण करे । बेशक कई प्लेटफ़ॉर्म पर जल पाइप लाइन का विस्तारण किया भी जा चुका है परन्तु प्रायः वहां जल आपूर्ति ही नहीं होती है। इसका कारण भ्रष्टाचार के चलते निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का प्रयोग तथा रेलवे प्लेटफ़ॉर्म की जलापूर्ति व्यवस्था के रखरखाव में बरती जा रही घोर लापरवाही है। जिसका ख़ामियाज़ा प्यासे रेल यात्रियों को भुगतना पड़ता है। क़ायदे से तो रेल विभाग को स्वछ व शीतल पेयजल की चलित प्रणाली प्रयोग में लानी चाहिये जो विशेषकर गर्मी में ट्रेन आने पर प्यासे रेल यात्रियों को जल मुहैय्या करवा सके। रेल विभाग को यह शिद्दत से महसूस करना चाहिये कि तिरंगा फहराकर केवल राष्ट्रवाद जागरण से नहीं बल्कि इस प्रचंड गर्मी में शीतल जल से ही रेल यात्री अपनी प्यास बुझा सकते हैं। रेल विभाग को 'हर घर झंडा' जैसे राष्ट्रव्यापी अभियान की ही तरह 'हर यात्री को शीतल जल' मुहैय्या कराने का अभियान प्राथमिकता के आधार पर चलाना चाहिय।—दैनिक हाक फीचर्स 



Related news