डॉ. वेदप्रताप वैदिक

पाकिस्तान के सत्तारुढ़ और विपक्षी नेताओं में इस बात को लेकर वाग्युद्ध चल पड़ा है कि क्या पाकिस्तान के तीन टुकड़े हो जाएंगे? इमरान खान ने एक साक्षात्कार में कह दिया कि अगर फौज ने सावधानी नहीं बरती तो पाकिस्तान के तीन टुकड़े हो सकते हैं। उनका अभिप्राय यह था कि शाहबाज़ शरीफ प्रधानमंत्री के तौर पर कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। देश में महंगाई, भुखमरी और गरीबी तेजी से बढ़ रही है। पाकिस्तान की फौज इतने बुरे हालात पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? जिस फौज ने इमरान खान को सत्ता से धकियाया, उसी फौज से वे पाकिस्तान को बचाने का अनुरोध कर रहे हैं। इमरान के बयान पर पूर्व राष्ट्रपति आसिफ जरदारी ने कहा कि वे नरेंद्र मोदी की भाषा बोल रहे हैं। शाहबाज शरीफ आजकल तुर्की में हैं। वे कह रहे हैं कि मैं देश के बिगड़े हुए हालात को काबू करने के लिए बाहर दौड़ रहा हूं और इमरान गलतबयानी करके कह रहे हैं कि पाकिस्तान का हाल सीरिया और अफगानिस्तान की तरह हो रहा है। इमरान ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान का खजाना खाली हो गया है। फौज अगर कमजोर पड़ गई तो परमाणु अस्त्र का ब्रह्मास्त्र निरर्थक हो जाएगा। ऐसी हालत में अमेरिका और भारत मिलकर कब पाकिस्तान के टुकड़े कर देंगे, कुछ पता नहीं। इमरान को अगला चुनाव जीतना है। इस लक्ष्य को पाने के लिए यह जरुरी है कि वह अमेरिका और भारत को कोसें। लेकिन जहां तक पाकिस्तान के तीन टुकड़े होने का सवाल है, सच्चाई तो यह है कि उसके तीन नहीं, चार टुकड़े करने की मांग बरसों से हो रही है। जब केंद्र की सरकार थोड़ी कमजोर दिखाई पड़ती हैं तो पाकिस्तान के टुकड़ों की मांग जोर पकड़ने लगती है। ये चार टुकड़े हैं— पख्तूनिस्तान, बलूचिस्तान, सिंध और पंजाब! पंजाब सबसे अधिक शक्तिशाली, संपन्न, बहुसंख्यक और शासन में आगे है। इन प्रांतों के अलगाववादी नेताओं से पाकिस्तान में मेरी कई बार मुलाकातें हुई हैं। उनमें अफगानिस्तान, ईरान, अमेरिका और ब्रिटेन में भी खुलकर बातें हुई है। कई पठान, बलूच और सिंधी नेता दिल्ली आकर भी मुझसे मिले हैं। उनके साथ हुए अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध तो मैंने उनके साथ सहानुभूति जरुर व्यक्त की है लेकिन उनसे हमेशा मैंने नम्र निवेदन किया है कि पाकिस्तान के तीन या चार टुकड़े करना न उनके लिए फायदेमंद है, न भारत के लिए। अभी तो भारत को सिर्फ एक पाकिस्तान से व्यवहार करना पड़ता है। फिर चार-चार पाकिस्तानों से करना पड़ेगा और यह भी देखना पड़ेगा कि आपके आपसी दंगलों की आग कहीं भारत को न झेलनी पड़ जाए। भारत को मध्य एशिया और यूरोप के रास्तों की भी किल्लत बढ़ जाएगी। इसके अलावा इन सब छोटे-मोटे देशों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली जाएगी, जिसका बोझ भी आखिरकार भारत को ही सम्हालना पड़ेगा। इसके अलावा स्वयं पाकिस्तान एक कमजोर और भूवेष्टित देश बन जाएगा। भारत तो चाहता है कि उसके सारे पड़ौसी देश संपन्न और सुरक्षित रहें। वे टूटे नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ जुड़ते चले जाएं।

—दैनिक हाक




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