नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोप के तीन देशों की तीन दिवसीय यात्रा पर सोमवार को रवाना होंगे। इससे पहले जारी बयान में उन्होंने यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों और मुलाकातों के बारे में जानकारी दीं। उन्होंने यूक्रेन युद्ध की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब यूरोप कई चुनौतियों और विकल्पों का सामना कर रहा है। 

पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि इस यात्रा से यूरोपीय देशों के साथ भागीदारी और सहयोग की भावना और ज्यादा मजबूत होगी। दौरे की जानकारी देते हुए विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पीएम मोदी इस दौरान यूक्रेन के संदर्भ में भारत का दृष्टिकोण भी सामने रखेंगे। हमारा शुरू से कहना रहा है कि यूक्रेन में शत्रुता खत्म होनी चाहिए और बातचीत के जरिए रास्ता निकाला जाना चाहिए।

पीएम मोदी ने जर्मनी, डेनमार्क और फ्रांस के दौरे के लिए प्रस्थान करने से पहले अपने बयान में कहा कि इस यात्रा का पहला पड़ाव बर्लिन होगा, जहां जर्मनी की चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ के साथ मुलाकात होगी और द्विपक्षीय चर्चा का मौका मिलेगा। 2 मई को पीएम मोदी बर्लिन में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करेंगे। बर्लिन के बाद वह कोपेनहेगन की यात्रा पर निकलेंगे, जहां प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसेन के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी। 

पीएम मोदी ने कहा कि इससे डेनमार्क के साथ हमारी अनूठी ‘हरित सामरिक साझेदारी’ में प्रगति की समीक्षा का अवसर मिलेगा। पीएम का 3 मई को कोपेनहेगन में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करने का कार्यक्रम है। पीएम मोदी ने कहा वापसी की यात्रा के दौरान वह अपने मित्र फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों से मिलने के लिए पेरिस में कुछ समय रुकेंगे। इस दौरान भारत-फ्रांस सामरिक साझेदारी के अगले चरण की रूपरेखा तैयार करने का अवसर मिलेगा। 

उन्होंने बताया कि वह डेनमार्क, आइसलैंड, फिनलैंड, स्वीडन और नॉर्वे के प्रधानमंत्रियों के साथ दूसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। यह शिखर सम्मेलन कोरोना महामारी के बाद आर्थिक सुधार, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा जैसे विषयों पर केंद्रित रहेगा। पीएम मोदी के साल के पहले विदेश दौरे की जानकारी देते हुए नवनियुक्त विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री 3 देशों की यात्रा व्यापक एजेंडा के साथ हो रही है। इस दौरान यूक्रेन के मसले पर भी बात होगी। यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए विदेश सचिव ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में ऊर्जा सुरक्षा का महत्व बढ़ गया है और यूरोपीय नेताओं के साथ पीएम मोदी की बातचीत में यह मुद्दा उठेगा।

उन्होंने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और डेनमार्क की यात्रा के दौरान पीएम यूक्रेन पर भारत का दृष्टिकोण सामने रखेंगे। हमने हमेशा कहा है कि यूक्रेन में शत्रुता खत्म होनी चाहिए और बातचीत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन पर यूरोपीय देशों की क्या स्थिति है, इस पर अभी टिप्पणी करना सही नहीं होगा।



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