पटना: चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा है कि सीएम नीतीश कुमार में परिवर्तन आया है, राजनीतिक शक्ति कम होने के साथ ऐसा साफ दिख रहा है। उन्होंने अपनी पदयात्रा के बारे में एक समाचार चैनल से कि पदयात्रा से बात बनाने की नहीं है, चुनाव लड़ना होता तो मैं 6 महीने पहले बिहार आकर चुनाव लड़ सकता था। 

उन्होंने कहा, "बिहार में 15 साल लालू जी और 15 साल नीतीश जी के राज में काम हुआ है। लेकिन दूसरा पहलू है कि नीतीश और लालू जी के 30 साल के राज के बाद बिहार देश का सबसे पिछड़ा राज्य है। विकास के सारे मानदंडों में हम देश के सभी राज्यों में से सबसे नीचे है। ये बताता है कि अभी तक जो भी हुआ है, उससे हम बिहार के और राज्यों की श्रेणी में खड़ा नहीं कर सकते। हमें रास्ता बदलना होगा। अब बहस ये है कि वो नया सोच और प्रयास किसका हो। ये शक्ति किसी दल के पास नहीं है, ये सिर्फ बिहार के लोगों के पास है।"

चुनावी रणनीतिकार ने कहा, "ऐसे लोगों को अगर साथ में लाया जाए और ये साथ में अगर आते हैं और नई व्यवस्था बनाते हैं, तो एक पार्टी बनाई जाएगी। वो मेरी पार्टी नहीं होगी, वो लोग मिलकर बनाएगे, उसमें मैं एक मेंबर हो सकता हूं। अभी जितने लोग मेरे संपर्क में हैं, मैं उनके घर जाऊंगा और उनसे खुद बात करूंगा। मिलकर उनको जनस्वराज की अवधारणा से जोडूंगा। फिर साथ मिलकर आगे का रास्ता तय करेंगे। ये काम हम सितंबर तक पूरा कर लेंगे। हमें नहीं पता कि हम पार्टी ही बनाएं। इसके लिए सामूहिक प्रयास होना ज़रूरी है। लालू जी और नीतीश जी ने भी प्रयास किया होगा।लेकिन अगर कोई परिवर्तन नहीं है तो रास्ता बदलना होगा। वो लोगों के हाथ में हैं, लोग जो तय करेंगे मैं अपनी ताकत उसके साथ लगाना चाहता हूं। जहां तक पदयात्रा है, वो इसका दूसरा पहलू है, इसलिए उसको 2 अक्टूबर रखा है।"

प्रशांत किशोर ने कहा, "बिहार की जनता को जनस्वराज के बारे में समझ आना चाहिए। अगर जनता स्कूल चाहती है और फ्लाईओवर बना रहे हैं, तो वो जनता के लिए गुड गवर्नेंस नहीं है। गुड गवर्नेंस जनता के हिसाब से ही हो। लोगों का जोड़ने के लिए गांव- गांव घर घर जाना होगा। मेरा प्रयास है कि पद यात्रा में 3000 किलोमीटर में बिहार के सारे शहर गांव में जाकर लोगों से बात करूं।मैं बिहार को बदलते हुए देखना चाहता हूं। मैं 10 साल से जो काम कर रहा था, उसमें मुझे सफलता मिली है। बंगाल की जीत के समय मैंने घोषणा कर दी थी कि मैं इस काम को छोड़ रहा हूं। आगे क्या करना है, वो सबको सुन के निर्णय लूंगा।" 




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