नयी दिल्ली: घरेलू मेट्रो रेल परियोजनाओं से निर्माण कार्यों से जुड़ी कंपनियों के लिये अगले पांच साल में 80,000 करोड़ रुपये मूल्य के कारोबार अवसर सृजित होंगे। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने यह संभावना जताई है।


देश के 15 शहरों में मेट्रो रेल परिचालन में है। इसकी कुल लंबाई करीब 746 किलोमीटर है और इनमें से ज्यादातर परियोजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसके अलावा सात अन्य शहरों में मेट्रो परियोजनाएं निर्माणधीन हैं जिनकी लंबाई करीब 640 किलोमीटर है।


इसके साथ ही 2,000 अरब रुपये की 1,400 किलोमीटर की मेट्रो रेल परियोजनाएं मंजूरी/प्रस्ताव के चरण में हैं। इसमें से 352 किलोमीटर के नये मेट्रो नेटवर्क को मंजूरी दी गई है। शेष अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं।


मेट्रो रेल परियोजनाओं के विस्तार से निर्माण क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के लिये अगले पांच साल में 80,000 करोड़ रुपये के कारोबार के अवसर सृजित होंगे।


इक्रा के सहायक उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट रेटिंग) अभिषेक गुप्ता ने कहा, ‘‘सरकार बुनियादी ढांचे पर जोर दे रही है। ऐसे में अगले पांच साल में मेट्रो रेल नेटवर्क में 2.7 गुना विस्तार होने की उम्मीद है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आम तौर पर मेट्रो रेल विकास की लागत एलिवेटेड मेट्रो के मामले में 280-320 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर के बीच होती है। जबकि भूमिगत मेट्रो नेटवर्क के मामले में लागत बहुत अधिक हो सकती है।’’ गुप्ता ने कहा कि कुल लागत में ‘सिविल’ निर्माण की हिस्सेदारी 35-45 प्रतिशत है। मेट्रो परियोजनाओं के वृहत आकार को देखते हुए यह अगले पांच साल में निर्माण क्षेत्र की कंपनियों के लिए बड़े अवसर प्रदान कर सकती है।

—भाषा



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