इटावा: समाजवादी पार्टी के संस्थापक और सरंक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन के कारण खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर पांच दिसंबर को होने वाले उप चुनाव को समाजवादी पार्टी ने अपनी नाक का सवाल बना लिया है। मैनपुरी को सपा का गढ़ माना जाता है। इस सीट को बचाने के लिए पार्टी ने पूर्व सांसद और अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव को चुनाव के मैदान में उतारा है। उनके खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी से दो बार लोकसभा सदस्य रहे रघुराज सिंह शाक्य को उतारा है।

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सैफई में अपने चाचा प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया (पीएसपीएल) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव से उनके आवास पर मिलने पहुंचेI अखिलेश के साथ मैनपुरी लोकसभा उप चुनाव के लिए सपा प्रत्याशी डिंपल यादव और पूर्व सांसद धर्मेन्द्र यादव भी शिवपाल से मिलने उनके आवास पर पहुंचे थे। इस दौरान परिवार के सदस्यों के अलावा किसी को भी घर में प्रवेश नहीं मिला। माना जा रहा है मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव को लेकर शिवपाल के साथ कई मुद्दों पर वार्ता करने को लेकर अखिलेश यादव, डिंपल यादव तथा धर्मेन्द्र यादव उनसे मिलने पहुंचे थे। मुलाकात के बाद अखिलेश ने फोटो भी ट्वीट की।

अखिलेश और शिवपाल के बीच मुलाकात करीब 45 मिनट तक चली। वहीं डिंपल ने चाची सास सरला यादव से भी मुलाकात की। इन सभी के शिवपाल के आवास पर आगमन की सूचना पर मीडिया का भी जमावड़ा लग गया। इस दौरान शिवपाल के आवास से परिवार के सदस्यों के अलावा सुरक्षा के जवान एवं निजी पीएसओ भी बाहर निकाले गए थे। इसके बाद अखिलेश एवं डिंपल यादव एक साथ गाड़ी में बैठकर बाहर निकले।

अखिलेश यादव मैनपुरी लोकसभा के उप चुनाव में हर मोर्चे को बेहद मजबूत बनाने में लगे हैं। लंबे समय से इटावा के साथ मैनपुरी में ही डटे अखिलेश यादव को भी पता है कि मैनपुरी के इस चुनाव में बिना शिवपाल सिंह यादव को अपने साथ रखे, उनकी पत्नी डिंपल की राहत आसान नहीं होगी। बीते दिनों डिंपल यादव की रिकार्ड जीत का दावा करने वाले अखिलेश यादव ने गुरुवार को बड़ा कदम उठाया।

अखिलेश ने गुरुवार को इटावा के सैफई में उन शिवपाल सिंह यादव से भेंट की, जिनकी विधानसभा चुनाव 2022 के बाद से वह काफी अनदेखी कर रहे थे। माना जा रहा है कि अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल को डिंपल यादव के चुनाव में प्रचार करने के लिए आमंत्रित किया है। उप चुनाव में अपने 40 स्टार प्रचारकों में शिवपाल सिंह यादव का भी नाम शामिल किया है। अब देखना है कि शिवपाल सिंह यादव प्रचार करने जाते हैं या नहीं।  



Related news