रामपुर: भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने बाकी बचे उम्मीदवारों की भी घोषणा सोमवार को कर दी है। पार्टी इस बार अपने किसी मुस्लिम नेता को राज्यसभा में नहीं भेज रही है जबकि सैयद जफर इस्लाम, एमजे अकबर और मुख्तार अब्बास नकवी का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इसमें मुख्तार अब्बास नकवी के सामने एक चुनौती यह भी है कि यदि वे संसद के किसी सदन के सदस्य नहीं रहते हैं तो 6 महीने के अंदर उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। लिहाजा राजनीतिक गलियारों में उनके रामपुर लोकसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव लड़ने की अटकलें लगने लगी हैं। बता दें कि नकवी 1998 में पहली बार रामपुर सीट से ही जीतकर सांसद बने थे। तब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें सूचना और प्रसारण मंत्री बनाया गया था। मुख्तार अब्बास नकवी, वर्तमान में नरेन्द्र मोदी सरकार के मंत्री हैं। बीजेपी में उन्होंने अपने लिए खास जगह बनाई है। पार्टी ने राज्यसभा के लिए कुल 22 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है लेकिन किसी भी सूची में नकवी का नाम न होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या पार्टी नकवी को आजम खान के गढ़ रामपुर के मैदान में उतारने का मन बना चुकी है। आजम खान के इस्तीफा देने से खाली हुई रामपुर संसदीय सीट पर उपचुनाव की घोषणा भी हो चुकी है। बीजेपी इस बार इस सीट को जीतने की पूरी कोशिश कर रही है। लिहाजा पार्टी रामपुर से नकवी के पुराने रिश्ते को देखते हुए उन पर दांव लगा सकती है। मुख्तार अब्बास नकवी 1998 में पहली बार रामपुर सीट से लोकसभा में पहुंचे थे। उन्होंने कुल तीन बार इस सीट से चुनाव लड़ा लेकिन 1999 और 2009 में वह चुनाव हार गए थे। 1998 के बाद नकवी कोई भी लोकसभा चुनाव नहीं जीत सके तो बीजेपी ने उन्हें झारखंड से राज्यसभा में भेजा। नकवी ने पिछले 13 साल से भले कोई चुनाव नहीं लड़ा लेकिन रामपुर में वह लगातार सक्रिय रहे हैं। बतौर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री उन्होंने रामपुर में हुनर हंट लगवाया था। वह महीने, दो महीने में रामपुर का दौरा करते रहते हैं। बताया जाता है कि रामपुर लोकसभा सीट पर 50 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। ऐसे में नकवी मुस्लिम और हिंदू वोटों का नया समीकरण बनाकर अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं। रामपुर सीट पर भगवा परचम लहराने को बेताब बीजेपी उन्हें मैदान में उतार सकती है। 



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