नई दिल्ली: प्रशांत किशोर की ओर से बीते 30 सालों में बिहार के पिछड़ने के दावे को राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने आधारहीन करार दिया है। यही नहीं उन्हें बिहार में कोई फैक्टर न मानते हुए तेजस्वी यादव ने यह भी पूछा कि वह कौन हैं। मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, 'प्रशांत किशोर का बयान कोई मायने नहीं रखता है। यहां तक कि उस पर कोई रिएक्शन भी नहीं दिया जा सकता। यह आधारहीन बयान है। मैं नहीं जानता कि वह कहां हैं, वह कौन हैं? वह अब तक कभी कहीं कोई फैक्टर नहीं रहे हैं।' दरअसल प्रशांत किशोर ने कहा था कि बीते 30 सालों में बिहार में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार का शासन रहा है और इस दौरान राज्य पिछड़ता रहा है। बता दें कि प्रशांत किशोर ने बीते दिनों 'जन सुराज' का ऐलान किया था और उनका कहना था कि इसकी शुरुआत बिहार से की जाएगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में प्रशांत किशोर राजनीतिक दल का गठन कर सकते हैं। कांग्रेस से लंबी बात चलने के बाद भी वह पार्टी में शामिल नहीं हुए थे और अब उनके ट्वीट ने हलचल तेज कर दी है। प्रशांत किशोर करीब एक दशक से अलग-अलग दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने का काम करते रहे हैं, लेकिन अब वह खुद राजनीतिक दल बनाकर जनता के बीच जाने की तैयारी में हैं। आरजेडी नेता ने मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार की नीतियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार बताएं कि बाहर में नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू होगा या फिर नहीं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की पार्टी ने संसद में इसे पारित कराने के लिए मतदान भी किया था। दरअसल नीतीश कुमार ने कहा था कि सीएए नीतिगत मुद्दा है और राज्य सरकार की बड़ी चिंता यह है कि लोगों को कोरोना संकट से बचाया जा सके। उन्होंने होम मिनिस्टर अमित शाह के उस बयान पर रिएक्शन दिया था, जिसके तहत उन्होंने कहा था कि कोरोना संकट की समाप्ति के बाद बाद सीएए को लागू किया जाएगा। तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि उनकी ही पार्टी ने संसद में सीएए का समर्थन किया था। ऐसे में अब इसे लेकर उनकी कोई भी राय मायने नहीं रखती है। तेजस्वी यादव ने कहा, 'सीएए और एनआरसी को लेकर हमारा स्टैंड क्लियर है। हमने इनका संसद में भी विरोध किया था और मैं नहीं मानता कि इसे बिहार में जल्दी ही लागू किया जाएगा। जेडीयू ने तो इसका समर्थन संसद में ही किया था। इस मामले को लेकर सड़कों पर लोग उतर आए थे और हर दल ने इस मसले पर अपनी राय जाहिर की थी। जब जेडीयू ने संसद में इसका समर्थन किया था तो फिर अब उनकी राय मायने ही नहीं रखती है।



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