नई दिल्ली: घातक कोरोना वायरस का संक्रमण अब सुस्त पड़ रहा है। कुछ दिनों से कोरोना वायरस के नए मामलों में कमी दर्ज की जा रही है। बीते 24 घंटे में देश में कोरोना के 5,076 नए मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा रविवार सुबह 8 बजे जारी आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटे में 11 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। एक दिन पहले देश में कोविड-19 के 5,554 नए केस मिले थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि देश में बीते 24 घंटे के दौरान सक्रिय मामलों में काफी कमी आई है। अब सक्रिय मामलों की संख्या 47,945 रह गई है।

सक्रिय मामलों में कुल संक्रमण का 0.11 प्रतिशत शामिल है। कोरोना मृत्यु दर 1.19 प्रतिशत है। कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से लेकर अब तक भारत में कुल 4 करोड़ 44 लाख 95 हजार 359 लोग इस वायरस से संक्रमित हुए हैं। इनमें से 4 करोड़ 39 लाख 19 हजार 264 लोग ठीक हुए हैं। वहीं, मृतकों की संख्या 5 लाख 28 हजार 150 पहुंच चुकी है। देश में कोरोना वैक्सीनेशन का आंकड़ा 214 करोड़ के पार पहुंच गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए देशभर में जारी वैक्सीनेशन अभियान के तहत अब तक वैक्सीन के 214 करोड़ 95 लाख 36 हजार 744 डोज दिए गए हैं।

कोविड-19 पर राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी परामर्श समूह (एनटीएजीआई) के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने आगामी त्‍योहारी सीजन को लेकर आम जनता को जरूरी सलाह दी है और सावधानी बरतने का आग्रह क‍िया है। एनटीएजीआई प्रमुख ने बताया क‍ि लोगों को कम से कम अगले 4 महीनों के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि फेस्‍ट‍िव सीजन से पहले लोगों को कोविड-19 वैक्सीन का बूस्टर डोज लेने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने ने कहा क‍ि 4 महीने के बाद, हम कोरोना महामारी से पहले वाली सामान्य स्थिति की ओर बढ़ना शुरू कर देंगे।

इस बीच, एनके अरोड़ा ने कहा कि भारत सीवेज सर्विलांस सहित कई अन्य तकनीकों को अपनाकर कोरोना के नए वेरिएंट्स के सर्कुलेशन की मैपिंग कर रहा है। उन्‍होंने यह भी कहा कि हम भविष्य में ऐसी किसी महामारी से निपटने के लिए बुनियादी ढांचा और तकनीक विकसित करने, एक मजबूत सर्विलांस मैकेनिज्म बनाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। डॉ. अरोड़ा ने कहा कि भारत बायोटेक की आने वाली नेजल वैक्सीन, जेनोवा की एमआरएनए वैक्सीन का उपयोग बूस्टर डोज के रूप में किया जा सकेगा, क्योंकि प्राथमिक चरण का टीकाकरण भारत में पहले ही बड़े स्तर पर हो चुका है



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