नई दिल्ली: खनन पट्टे के चलते विवादों में घिरे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तरफ से अभी तक मामले पर बयान नहीं आया है। वहीं, कोर्ट की तरफ से भी इस केस में कोई ताजा सुनवाई नहीं हुई हैं। इधर, विपक्ष ने भी सरकार के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है और सोरेन को सीएम के तौर पर अयोग्य घोषित करने की मांग की जा रही है। आरोप है कि उन्होंने रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1951 का उल्लंघन किया है। साथ ही इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की भी एंट्री हो चुकी है। इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं फरवरी में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान उन्होंने कुछ दस्तावेज सामने रखे थे, जिनमें सोरेने पर 'पद का दुरुपयोग' कर रांची जिले में अपने पक्ष में पत्थर की खदान के पट्टे के लिए मंजूरी हासिल करने के आरोप लगाए थे। खास बात है कि ईसीआई ने भी राज्य के पर्यावरण और खनन विभाग संभालने वाले सोरेन से उनका मत पूछा था। खनन विभाग के दस्तावेजों को लेकर दास ने आरोप लगाए कि यह रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट की धाराओं का उल्लंघन है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इससे भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत आरोप लग सकते हैं। 25 अप्रैल को एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दास ने आरोप लगाए थे कि सोरेन के पद पर रहते हुए उनकी पत्नी को 11 एकड़ औद्योगिक भूमि मिली थी। केंद्र के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पोर्टल पर दर्ज दस्तावेज दिखाते हैं कि सोरेन ने रांची जिले के अंगारा ब्लॉक में 0.88 एकड़ में खनन पट्टे की मंजूरी के लिए आवेदन दिया था। खदान में उत्पादन 6 हजार 171 टन प्रति वर्ष दिखाया गया था और प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 26 लाख रुपये बताई गई थी। इसमें बताया गया था कि प्रस्तावित योजना 5 साल की है और खदान का अनुमानित जीवन 5 साल का था।



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