मुस्लिम पक्ष ने ऊपरी अदालत जाने की कही बात 

वाराणसी: ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सोमवार को ज्ञानवापी स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और विग्रहों के संरक्षण पर वाराणसी कोर्ट ने अपना अहम फैसला सुना दिया है। जिला जज डॉ. अजय कृष्‍ण विश्‍वेश की अदालत ने याचिका पर आगे भी सुनवाई करने का फैसला लिया है। जज का फैसला आते ही कोर्ट परिसर हर हर महादेव के जयकारे से गूंज उठा। वकीलों ने भी जमकर नारे लगाए। 

मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि ये फैसला न्यायोचित नहीं है। हम फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। जज साहब ने फैसला लेकर सांसद के कानून को दरकिनार कर दिया। ऊपरी अदालत के दरवाजे हमारे लिए खुले हैं। 

जिला जज डॉ. विश्‍वेश की अदालत मेंटेनेबिलिटी यानी पोषणीयता पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी मस्जिद केस में आगे सुनवाई होगी। कोर्ट को सोमवार को यही फैसला करना था कि यह याचिका सुनने योग्य है या फिर नहीं। वहीं मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी गई है।

यह आदेश ऑर्डर 7 रूल नंबर 11 के आधार पर दिया गया। इस यदि आसान भाषा में समझा जाए, तब इसके तहत कोर्ट किसी केस में तथ्यों की मैरिट पर विचार करने के बजाए सबसे पहले ये तय किया जाता है, कि क्या याचिका सुनवाई करने लायक है भी या नहीं। रूल 7 के तहत कई वजह है, जिनके आधार पर कोर्ट शुरुआत में ही याचिका को खारिज कर देता है। यदि याचिकाकर्ता ने याचिका को दाखिल करने की वजह स्पष्ट नहीं की हो या फिर उसने दावे का उचित मूल्यांकन न किया हो या उसके मुताबिक कोर्ट फीस न चुकाई गई हो। इसके अलावा जो एक महत्वपूर्ण आधार है वहां है कि कोई कानून उस मुकदमे को दायर करने से रोकता हो।

ज्ञानवापी मस्जिद के पार्श्‍व भाग में स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन के साथ 1993 के पूर्व की स्थिति बहाल करने की मांग को लेकर नई दिल्‍ली निवासी राखी सिंह और वाराणसी की लक्ष्‍मी देवी, सीता शाहू, मंजू व्‍यास और रेखा पाठक की तरफ से सिविल जज की अदालत में वाद दाखिल किया गया था। इस वाद की सुनवाई के दौरान बीते मई महीने में सिविल जज (सीनियर डिविजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत के आदेश पर पूरे ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे हुआ।

चार दिनों तक चले सर्वे में खींची गई करीब 1500 तस्‍वीरों और 12 घंटे की विडियोग्राफी के साथ वकील कमिश्‍नर की अदालत में पेश रिपोर्ट से चौंकाने वाले खुलासा हुए। हिंदू पक्ष के अनुसार ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में जगह-जगह प्राचीन मंदिर के पुख्‍ता प्रमाण मिले, तब वजूखाने में शिवलिंग की आकृति वाला कथित फव्‍वारा मिलने पर आदि विश्‍वेश्‍वर का शिवलिंग मिलने का दावा किया गया था। वकील कमिश्‍नर की रिपोर्ट के मुताबिक मस्जिद के मुख्‍य गुंबद के नीचे खंभे और इमाम बैठने वाले स्‍थान के ऊपर भी त्रिशूल, डमरू और स्‍वास्तिक के चिह्न दिखाई दिए।

एएसआई सर्वे और शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग करेगा हिंदू पक्ष 

ज्ञानवापी-शृंगार गौरी केस में हिंदू पक्ष ने कहा है कि फैसला यदि उसके पक्ष में आता है, तब भारत पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) से सर्वे और शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने की मांग करेगा। 

उन्‍होंने कहा कि 1991 का उपासना अधिनियम हमारे पक्ष में है, क्योंकि हमारा कहना है कि 15 अगस्त 1947 को इस जगह का धार्मिक स्वरूप एक हिंदू मंदिर का था और मुझे लगता है कि अगर आने वाले समय में ये आवेदन अस्वीकार होती है,तब धार्मिक स्वरूप को तय करने की कवायद और आगे बढ़ेगी। उन्‍होंने कहा कि यदि फैसला हमारे पक्ष में आता है, तब हम एएसआई सर्वे और शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग करने वाले हैं। 





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