नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार द्वारा 2019 में लाए गए 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण को बरकरार रखकर सुप्रीम कोर्ट के बहुमत के फैसले ने पार्टी के रुख और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के नारे की पुष्टि की है। बीजेपी सूत्र ने कहा, देश में एक निहित स्वार्थी समूह है, जिसकी रोजी-रोटी सामाजिक विभाजन करके चलती है, वहीं लोग इसतरह के गैरजरूरी मुद्दों को उठा रहा है। जब 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण आया, तब सभी जातियों और समुदायों के लोगों ने इसका स्वागत किया। किसी भी बिंदु पर, एससी या एसटी समुदायों को यह महसूस नहीं हुआ कि उनके अधिकार छीने जा रहे हैं। पीएम मोदी खुद ओबीसी समुदाय से हैं और गरीबों और दलितों की मांगों के प्रति संवेदनशील हैं। 

भाजपा सूत्रों ने बताया कि ईडब्ल्यूएस का निर्णय उल्लेखनीय था, क्योंकि इसने कुछ वर्ग के लोगों को लाभ दिया, लेकिन दूसरे वर्गों का लाभ छीना नहीं। भाजपा सूत्र ने इसका उल्लेख करते हुए कहा कि आरक्षण कैसे आजाद भारत के इतिहास में एक पेचीदा मुद्दा रहा है, कहा, ‘मोदी सरकार ने जो किया वह भेदभाव और विभाजन की पिछली संस्कृति पर एक विराम था, जहां एक समूह को कुछ देने के लिए, दूसरे समूह से कुछ छीन लिया जाता था। सूत्रों ने कहा कि ईडब्ल्यूएस मुद्दे को संभालना प्रधानमंत्री मोदी के ‘निर्णय की विशिष्टता को दर्शाता है और उनके काम करने के तरीके को इंगित करता है। 

भाजपा सूत्र ने कहा कि जब ईडब्ल्यूएस का फैसला लिया गया था तब हिंसा की एक भी घटना नहीं हुई थी और यह सद्भाव आज भी जारी है। यह लोगों के लिए मोदी सरकार की करुणा और कड़े फैसले लेने और उन्हें तार्किक परिणति तक ले जाने की उसकी क्षमता को दर्शाता है। ईडब्ल्यूएस आरक्षण उन लोगों को उच्च शिक्षा और रोजगार में समान अवसर प्रदान करके सामाजिक समानता लाता है, जिन्हें उनकी आर्थिक स्थिति के कारण मुख्यधारा से बाहर होना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ईडब्ल्यूएस आरक्षण को अपनी सहमति देकर कहा कि यह कानून बुनियादी ढांचे का उल्लंघन नहीं करता है। 

भाजपा सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार ने ओबीसी समुदाय के हितों की रक्षा के लिए एक ओबीसी आयोग की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा किया है और एससी/एसटी अधिनियम के प्रावधानों को और कड़ा करके समुदाय के लोगों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित की है। 







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