कुमार दुष्यंत

हरिद्वार (दैनिक हाक): आजादी का अमृत महोत्सव बीतने के पंद्रह दिन बाद भी हरिद्वार में जहां तहां राष्ट्रीय ध्वज टंगे हुए हैं।लोगों ने तिरंगें भी राजनीतिक दलों के झंडों की तरह लगा रखे हैं। प्रशासन भी इसको लेकर बेखबर है। इस वर्ष आजादी के पिचहतर वर्ष पूर्ण होने पर केंद्र सरकार ने 13 से 15 अगस्त तक आजादी का अमृत महोत्सव मनाने का निर्णय लिया था, जिसके तहत लोगों को ध्वज बांटकर सभी से इस दौरान घरों, प्रतिष्ठानों में ध्वज लगाने का आह्वान किया गया था। लेकिन यह ध्वज अबतक लगे हुए हैं। कई भवनों पर तो ध्वज तीस और साठ की डिग्री पर टंगे हैं। जबकि कुछ स्थानों पर ध्वज झुके हुए हैं। कई स्थानों पर ध्वज बारिश के कारण डंडों में लिपटे हुए लगे हैं। लोगों ने अपनी दुकानों पर भी राष्ट्रीय ध्वज बाहर की ओर निकालकर राजनीतिक दलों के झंडों की तरह लगा रखे हैं। इससे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान और ध्वज संहिता का उल्लंघन हो रहा है। लेकिन भी प्रशासन इससे बेखबर बना हुआ है।

राष्ट्रीय ध्वज को लगाने के लिए इसके प्रोटोकॉल का पालन करना सभी के लिए जरूरी होता है। इसीलिए इसे विशेष अवसरों पर ही लगाया जाता है। सरकार ने भी आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान 13 से 15 अगस्त के बीच ही लोगों से तिरंगा लगाने का आह्वान किया था। लेकिन तब के लगे ये राष्ट्रीय ध्वज अब तक टंगे हैं। बारिश में भीगने के कारण ध्वज गंदे और क्षतिग्रस्त भी हो गये हैं। नियमानुसार राष्ट्रीय ध्वज भीगा हुआ, गंदा या कटा फटा नहीं होना चाहिए। ध्वज झुका हुआ और जमीन से लगता हुआ भी नहीं होना चाहिए। लेकिन प्रशासन की बेखबरी और लोगों को ध्वज नियमों की जानकारी न होने के कारण राष्ट्रीय ध्वज अब भी बेकदरी के साथ इधर उधर लगे हुए हैं, जिससे राष्ट्रीय ध्वज व ध्वज संहिता का अपमान हो रहा है।


ध्वज निस्तारण के भी हैं नियम

आम लोगों को ध्वज फहराने का अधिकार 2009 में सांसद व उद्योगपति नवीन जिंदल के प्रस्ताव पर मिला। पहले केवल राष्ट्रीय ध्वज सूर्य उदय काल में ही फहराया जाता था लेकिन संशोधन के बाद देश में उच्च स्तंभों पर रोशनी में दिनरात तिरंगे लगाने की अनुमति दी गई। ध्वज के निस्तारण के लिए भी उसे या तो एकांत में सम्मान पूर्वक जलाने अथवा किसी बाक्स में सम्मान पूर्वक रखकर साफ सुथरी जमीन में दबाने का नियम है।


आजादी के अमृत महोत्सव के तहत 13 से 15 अगस्त तक ही ध्वज लगाने का आह्वान था। इसके बाद इन्हें सम्मानजनक तरीके से उतार लिया जाना चाहिए था। सभी एसडीएम को निर्देशित किया जा रहा है कि वह अपने अपने क्षेत्रों में अबतक लगे हुए राष्ट्रीय ध्वजों को सम्मान पूर्वक उतरवाएं।

     —विनय शंकर पाण्डेय,  जिलाधिकारी हरिद्वार।






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