नई दिल्ली : केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज अरुणाचल प्रदेश के तिरप ज़िले के नरोत्तम नगर में रामकृष्ण मिशन के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अमित शाह ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण भी किया। एक अन्य कार्यक्रम में गृह मंत्री ने लोहित ज़िले में प्रसिद्ध परशुराम कुंड पर भगवान परशुराम की 51 फुट ऊँची कांस्य प्रतिमा की आधारशिला रखी। इस अवसर पर केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रीजीजू और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडु समेत अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। 

रामकृष्ण मिशन के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मैं जब भी अरुणाचल आता हूँ और कोई नमस्ते की जगह जय हिन्द कहता हो तो शरीर के रोंगटे खड़े हो जाते हैं,पूरे देश में इतनी राष्ट्रभक्ति और जागरूकता अरुणाचल के अलावा शायद और कहीं नहीं है। 50 साल से अरुणाचल प्रदेश में एक संस्था और उसके अनेक संन्यासियों ने यहाँ के हज़ारों बच्चों को शिक्षित करने और सँवारने का काम किया है। अमित शाह ने कहा कि बचपन में एक संन्यासी कहा करते थे कि मंदिर बनाना बहुत पुण्य का काम है,स्कूल बनाना इससे भी बड़ा पुण्य का काम है, लेकिन एक व्यक्ति को अच्छा इंसान बनाने से बड़ा पुण्य का काम और कोई नहीं हो सकता। रामकृष्ण मठ ने 50 साल से एक दुर्गम जगह, सातत्यपूर्ण तरीक़े से बिना थके और अक्षय ऊर्जा के साथ इस सेवा को जारी रखा है। वे इस अक्षय ऊर्जा को शायद रामकृष्ण परमहंस या पूरे देश के लिए चेतना के स्रोत स्वामी विवेकानंद के उपदेशों से प्राप्त करते हैं। 50 साल से अक्षुण्ण रूप से इस सेवा भाव को चालू रखने के लिए मैं रामकृष्ण मिशन के सभी संन्यासियों को करबद्ध होकर ह्रदय से धन्यवाद करता हूँ।

अमित शाह ने कहा कि हमने समग्र नार्थईस्ट में सालो तक कई प्रकार की समस्याओं को झेला है,अब धीरे-धीरे इन समस्याओं का निवारण भी हो रह है। लेकिन अरुणाचल प्रदेश को कभी भी इन समस्याओं से घिरे नहीं देखा,इसका कारण पचास साल से अधिक समय से यहाँ रामकृष्ण मिशन द्वारा चलाया जा रहा सेवा का यज्ञ है। रामकृष्ण मिशन ने देश के हर क्षेत्र में चाहे वह दूरदराज के पहाड़ी इलाके हों या आदिवासी क्षेत्र,सबसे बड़ा काम स्थानीय संस्कृति,सभ्यता,संगीत,भाषा और स्वधर्म को बचाने और उसे अक्षुण्ण रखने का किया है। आज पूरा अरुणाचल राष्ट्र की मुख्यधारा में है और अपनी संस्कृति,संगीत और भाषा को बचाए रखते हुए स्वधर्म के मार्ग पर चल रहा है, उसका मुख्य कारण रामकृष्ण मठ के सन्यासियों द्वारा यहाँ 50 साल से की गई तपस्या है। उन्होंने कहा कि हम जब भी अरुणाचल आते हैं, यहां से उर्जा और देशभक्ति के संस्कार लेकर वापस जाते हैं, इसलिए मैं अरुणाचल की जनता को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। गृह मंत्री ने कहा कि रामकृष्ण मिशन एक परमहंस की स्मृति में एक सन्यासी द्वारा दी गई सबसे बड़ी गुरु दक्षिणा है। भारत में चिरपुरातन काल से ही गुरु दक्षिणा की परंपरा रही है मगर किसी भी शिष्य ने अपने गुरु को इतनी बड़ी गुरु दक्षिणा नहीं दी होगी जो स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना कर अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस को दी। गुरु के संदेश को बिना किसी चकाचौंध के त्याग, समर्पण और बलिदान से पूरे देश और दुनिया के अंदर पहुंचाना और सेवा समर्पण को ही अपना धर्म समझ कर आगे बढ़ना विवेकानंद जी के बगैर शायद कोई और नहीं कर सका। गृह मंत्री ने कहा कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का भी रामकृष्ण मिशन से काफी जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा कि अनेक रोगियों की सेवा,अनेक विद्यार्थियों के जीवन को गढ़ते, अनेक प्रकार की कुरीतियों से समाज को बचाते, समाज की आंतरिक चेतना और हमारी संस्कृति पर अनेक प्रकार के आक्रमण को रोकते हुए रामकृष्ण मिशन ने आज पुण्य का एक बहुत बड़ा लोक अर्जित किया है और पूरा देश पुण्य के इस लोक को प्रणाम करता है।



Related news