नई दिल्ली: भारत में गेहूं उत्पादन का आधिकारिक आंकड़ा जारी हुआ है। भीषण गर्मी के कारण भारत में 20 साल से भी अधिक समय में सबसे कम गेहूं उत्पादन हुआ है। गेहूं की सर्वाधिक उपज वाले राज्यों पंजाब, हरियाणा और यूपी में भी इस बार पैदावार अच्छी नहीं हुई है। तेज धूप ने गेहूं की फसलों को झुलसा दिया है। गेहूं की फसलें धूप के कारण भूरे रंग की हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के एक जिले में गेहूं के किसान ने बताया कि उसकी फसल सुनहरे पीले रंग के बाद भूरे रंग में बदल गई। बता दें कि यह भीषण गर्मी में फसलों और दानों के सिकुड़ने का संकेत है। 

आंकड़ों के मुताबिक पंजाब, हरियाणा और उत्तरप्रदेश में गेहूं की उत्पादकता में दो दशकों में सबसे अधिक गिरावट आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल का नुकसान साल 2010 से भी बड़ा है। 2010 में भी इस बार की तरह ही हीटवेव दिखाई दी थी। जानकारों के मुताबिक गेहूं जैसी मुख्य फसल पर मौसम का खतरनाक प्रभाव भारत लंबी अवधि में भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। 

वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके दीर्घकालिक असर देखने को मिल सकते हैं। जिन इलाकों में गेहूं का उत्पादन अधिक है वह भौगोलिक रूप से प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा आर्थिक दृष्टि से देखा जाए तब इसका असर आम लोगों के बजट पर भी पड़ सकता है। कम पैदावार होने का मतलब है कि बाजार में गेहूं किल्लत और दामों में वृद्धि होगी। इसका असर किसानों पर भी पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि उन्हें 12-18 हजार रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हुआ है और वे कर्ज में दब गए हैं। उनकी प्रति हेक्टेयर पैदावार में करीब 20 फीसदी की गिरावट हुई है। 

2016 में सरकारी रिपोर्ट में कहा गया था कि 2.5 से 4.9 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने से गेहूं की पैदावार 41-52 फीसदी तक घट सकती है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में गंगा के मैदानों में बढ़ती गर्मी का असर दिखेगा। गौरतलब है कि यह वह इलाका है जो दुनिया के प्रमुख गेहूं उत्पादन क्षेत्रों में से एक है। 






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