नयी दिल्ली: भारत सामाजिक सुरक्षा समझौतों (एसएसए) पर अमेरिका और ब्रिटेन के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि ऐसी योजनाओं के दोहराव से बचा जा सके। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।


इन देशों के साथ एसएसए से नियोक्ता सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत कर्मचारियों के समान समूह (अन्य देशों में तैनात) के लिए दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान से बच सकेंगे। इसके अलावा, कर्मचारियों को भी सामाजिक सुरक्षा के लिए दोहरा योगदान नहीं करना पड़ेगा।


यादव ने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) द्वारा आयोजित दो दिन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भारतीय श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर करने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन के साथ बातचीत जारी है।’’


भारत का बेल्जियम, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, डेनमार्क, दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड, हंगरी, फिनलैंड, स्वीडन, चेक गणराज्य, नॉर्वे, ऑस्ट्रिया, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान और पुर्तगाल के साथ सामाजिक सुरक्षा करार है।


इस समझौते के आधार पर रोजगार के लिए विदेश जाने वाले भारतीयों को एसएसए देशों में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में योगदान करने की जरूरत नहीं होती है। वे और उनके नियोक्ता विदेश में सेवा करते हुए भारत में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा चलाई जा रही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को जारी रख सकते हैं।


मंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने अबतक खाड़ी सहयोग परिषद के छह देशों के साथ प्रवासन और गतिशीलता भागीदारी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।


—भाषा



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