नई दिल्‍ली: बांग्‍लादेश, फिलीपींस और तंजानिया सहित कुछ देशों को गेहूं निर्यात करने की अनुमति केंद्र सरकार ने दे दी है। कुछ शर्तों के साथ निर्यात की यह अनुमति उन देशों में गेहूं भेजने के लिए दी गई है, जिन्‍होंने अपनी खाद्य सुरक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत से गेहूं देने का अनुरोध किया था। गौरतलब है कि घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों को देखते हुए भारत ने गेहूं निर्यात पर 14 मई को प्रतिबंध लगा दिया था। निर्यात पर प्रतिबंध के बाद सरकार ने स्‍पष्‍ट किया था कि जिन कंपनियों को लेटर आफ क्रेडिट जारी हो चुका है, वो गेहूं निर्यात कर सकेगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों ने रॉयटर्स को भारत से गेहूं निर्यात किए जाने की जानकारी दी है। भारत बांग्लादेश, फिलीपिंस, तंजानिया और मलेशिया को 4,69,202 टन गेहूं भेजेगा। गेहूं व्‍यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि लगभग 17 लाख टन गेहूं बंदरगाहों पर पड़ा है। भारत में मानसून सीजन शुरू होने वाला है। मानसून की बारिश से इस गेहूं के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। 

अधिकारी ने बताया कि प्रतिबंध के चलते मई में भारत का गेहूं निर्यात घटकर 11.3 लाख टन रह गया, जबकि अप्रैल में यह 14.6 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। गेहूं की वैश्विक कीमतों में भारी वृद्धि होने के कारण, भारत में गेहूं की कीमतों में भी भारी उछाल आया था। देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने 14 मई को गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी। हालांकि, विशेष शर्तों के तहत गेहूं के निर्यात को अनुमति देने की बात तब सरकार ने कही थी। ताजा शिपमेंट की अनुमति लेटर ऑफ क्रेडिट के जरिये दी गई है जो पहले ही जारी किए जा चुके हैं । साथ ही इस गेहूं की आपूर्ति ऐसे देशों को की जानी है, जिन्हें अपनी फूड सिक्योरिटी की जरूरतों को पूरा करने के लिए गेहूं की जरूरत है । ग्लोबल ट्रेडिंग फर्म्स से जुड़े तीन डीलर्स ने बताया कि विभिन्न बंदरगाहों पर कम से कम 17 लाख टन गेहूं पड़ा हुआ है। इस साल 80 लाख से 1 करोड़ टन गेहूं के निर्यात की अनुमति मिलने की उम्मीद की जा रही थी। पिछले साल 72 लाख टन गेहूं के निर्यात की अनुमति मिली थी।



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