नई दिल्ली: 5जी का बेसब्री से इंतजार कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। मोदी सरकार का कहना है कि टेलिकॉम ऑपरेटर्स इसी वित्त वर्ष के दौरान देश में 5जी मोबाइल सेवाएं शुरू कर सकते है। संचार, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में इसकी जानकारी दी। 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी 26 जुलाई से शुरू हो रही है। डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम का कहना है कि 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए उस चार कंपनियों से आवेदन मिले हैं। इसमें अडानी डेटा नेटवर्क्स लिमिटेड, रिलायंस जियो इन्फोकॉम, वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल लिमिटेड शामिल हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जून में देश में 5जी दूरसंचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी को मंजूरी दे दी थी। मंत्रिमंडल ने साथ ही बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों को अपने इस्तेमाल (कैप्टिव) के लिए 5जी नेटवर्क की स्थापना को भी मंजूरी दी थी। अडानी ग्रुप ने 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में हिस्सा लेने के लिए कमर कस ली है। अडानी ग्रुप का कहना है कि उसका इरादा कंज्यूमर मोबिलिटी स्पेस में जाने का नहीं है और कंपनी अपने इस्तेमाल के लिए स्पेक्ट्रम यूज करेगी। लेकिन जानकारों का कहना है कि गौतम अडानी टेलिकम्युनिकेशन सेक्टर में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं।

बात दें कि गौतम अडानी भी मुकेश अंबानी की तर्ज पर ही इस सेक्टर में आगे बढ़ रहे हैं। रिलायंस ने 2010 में इन्फोटेल ब्रॉडबैंड को खरीदकर टेलिकॉम सेक्टर में प्रवेश किया था। उसके बाद आईएसपी लाइसेंस था और उसने 2010 की नीलामी में 2300एमएचजैड स्पेक्ट्रम खरीदा था। 2013 में सरकार ने यूनिफाइड लाइसेंस के लिए आवेदन मंगाए और रिलांयस को लाइसेंस मिल गया। इससे रिलायंस जियो को किसी भी स्पेक्ट्रम पर इंटरकनेक्टेड वॉयस सर्विसेज देने का मौका मिल गया। रिलायंस ने 2016 में जियो को लांच करके भारतीय टेलिकॉम सेक्टर में तहलका मचा दिया था। जानकारों का कहना है कि अगर अडानी अपने यूज के लिए स्पेक्ट्रम खरीदना चाहते थे, तब वह कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क परमिट ले सकते थे लेकिन उन्होंने महंगी नीलामी का रास्ता चुना। इससे साफ है कि अडानी की भविष्य में टेलिकॉम सेक्टर में बड़ा दांव खेलने की तैयारी है। यानी आने वाले दिनों में भारत और एशिया के दो सबसे बड़े के बीच टेलिकॉम सेक्टर में टक्कर देखने को मिल सकती है। अगर ऐसा होता है, तब इसका फायदा ग्राहकों को मिल सकता है।

माना जा रहा है कि 5जी के आने के बाद मोबाइल टेलिफोन की दुनिया पूरी तरह बदल जाएगी। 5जी की स्पीड 4जी से 10 गुना ज्यादा है। 5जी आने के बाद ऑटोमेशन बढ़ जाएगा। अभी तक जो चीजें बड़े शहरों तक सीमित है वे गांव-गांव तक पहुंचेंगी। इंटरनेट ऑफ थिंग्स और औद्योगिक आईओटी और रोबोटिक्स की तकनीक को नए पंख लगेगा। इससे देश की इकॉनमी को फायदा होगा और ई-गवर्नेंस का विस्तार होगा। इससे कारोबार, शिक्षा, हेल्थ और एग्रीकल्चर जैसे सेक्टर्स में क्रांति आ सकती है। 4जी नेटवर्क पर जहां औसतन इंटरनेट स्पीड 45एमबीपीएस होती है लेकिन 5जी नेटवर्क पर यह बढ़कर 1000 एमबीपीएस तक पहुंच जाएगी। 



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