West Bengal Politics : हुमायूं कबीर-मोहम्मद सलीम मुलाकात पर बिकाश भट्टाचार्य बोले- 'निजी मुलाकात पर सवाल गलत'

वायरल वीडियो पर सियासत गरम, सीपीआई(एम) सांसद बोले—निजी मुलाकात पर सवाल अनुचित
हुमायूं कबीर-मोहम्मद सलीम मुलाकात पर बिकाश भट्टाचार्य बोले- 'निजी मुलाकात पर सवाल गलत'

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गलियारों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक हुमायूं कबीर और सीपीआई (एम) नेता मोहम्मद सलीम की मुलाकात का वीडियो वायरल होने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुलाकात पर सीपीआई (एम) सांसद बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दो व्यक्तियों की निजी मुलाकात पर सवाल उठाना अनुचित है।

सीपीआई (एम) सांसद बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मुझे नहीं पता कि यह सवाल क्यों पूछा जा रहा है। क्या कोई ऐसी रोक है कि दो सज्जन एक-दूसरे से मिल नहीं सकते? सिर्फ इसलिए कि उनका कोई राजनीतिक जुड़ाव है? यह गलत अटकल है।"

भट्टाचार्य ने आगे कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर लोग मिल सकते हैं और इससे किसी गठबंधन या साजिश का मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने टीएमसी और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों पार्टियां अक्सर ऐसे वीडियो और मुलाकातों का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करती हैं।

सिंगूर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हालिया सभा के वायरल वीडियो पर भी भट्टाचार्य ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी ने सभा में स्कूल के छात्रों का इस्तेमाल किया और उन्हें भीड़ दिखाने के लिए मजबूर किया। भट्टाचार्य ने कहा, "यह टीएमसी पार्टी के लिए कोई नई बात नहीं है। टीएमसी और भाजपा की मीटिंग में वे उन लोगों को मजबूर करते हैं जिन्हें किसी न किसी तरह से सरकारी फायदे मिल रहे हैं। स्कूल के स्टूडेंट्स का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए किया गया कि लोगों की बहुत बड़ी भीड़ जमा हुई थी।"

भट्टाचार्य ने कहा, "अच्छी बनी हुई फैक्ट्री को शिफ्ट कर दिया गया। यह हमारी इकॉनमी और पश्चिम बंगाल के मजदूर वर्ग की कीमत पर ममता की तरफ से मोदी को एक तोहफा था।"

उन्होंने याद दिलाया कि सिंगूर में टाटा मोटर्स की नैनो फैक्ट्री बंद होने के बाद राज्य की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ और हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए। गठबंधन की संभावनाओं पर सवाल के जवाब में भट्टाचार्य ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, "देखिए, हमारी पार्टी का रुख बहुत साफ है कि हम वामपंथी लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष ताकतों की एकता बनाना चाहते हैं और उस फैसले से कोई बदलाव नहीं हुआ है।"

उन्होंने जोर दिया कि सीपीआई (एम) किसी भी सत्ताधारी दल के साथ समझौता नहीं करेगी, बल्कि विपक्षी एकता को मजबूत करने पर फोकस रहेगी।

--आईएएनएस

 

 

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