भुवनेश्वर: ओडिशा में उच्च शिक्षा के लिए संशोधित आरक्षण नीति को कैबिनेट की मंजूरी दिए जाने के बाद कांग्रेस की राज्य इकाई ने फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, ओडिशा कांग्रेस के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने आरोप लगाए हैं कि 54 प्रतिशत आबादी वाले ओबीसी वर्ग को न्याय नहीं मिल रहा है।
ओडिशा कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "उच्च शिक्षा और नई शिक्षा नीति के संबंध में यह घोषणा की गई है कि अब एससी और एसटी वर्ग के छात्रों को मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई में आरक्षण मिलेगा, जो पहले लागू नहीं था। यह एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, चिंता की बात अब भी बनी हुई है कि राज्य में ओबीसी समुदाय के लोगों, जो कुल आबादी का 54 प्रतिशत हिस्सा हैं, को न्याय नहीं मिल रहा है।"
उन्होंने कहा, "यह सरकार ओबीसी वर्ग के लोगों की उपेक्षा कर रही है। ओबीसी वर्ग के लोग लंबे समय से अपनी आबादी के अनुपात के आधार पर तकनीकी और उच्च शिक्षा में आनुपातिक आरक्षण की मांग करते आ रहे हैं।"
गौरतलब है कि एक ऐतिहासिक फैसले के तहत ओडिशा सरकार ने शनिवार को अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाई। साथ ही मेडिकल और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में 'सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों' (एसईबीसी) के लिए भी एक अलग कोटा लागू कर दिया।
यह फैसला भुवनेश्वर में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। इसमें कहा गया कि जहां एसटी छात्रों के लिए कोटा 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 22.50 प्रतिशत कर दिया गया है, वहीं एससी के लिए इसे 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 16.25 प्रतिशत कर दिया गया है। राज्य सरकार ने 11.25 प्रतिशत का कोटा शुरू किया है।
ओडिशा कांग्रेस के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने यह भी कहा कि बिहार और झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे अन्य राज्यों में पहले भी इसी तरह के प्रावधान लागू किए जा चुके हैं, जिससे यह साबित होता है कि इस निर्धारित सीमा से आगे बढ़ना संभव है।
--आईएएनएस

