Maharashtra Politics : पुणे में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भारी वृद्धि

हर्षवर्धन सपकाल का आरोप: पुणे में अपराध बढ़े, सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल
कांग्रेस का दावा: पुणे में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भारी वृद्धि

पुणे: महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गुरुवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस को 'नए पुणे का निर्माता' बताए जाने के बाद से पुणे में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में तेजी से वृद्धि हुई है।

सपकाल ने सवाल किया कि सिर्फ तीन महीनों में, जनवरी से मार्च तक, यौन शोषण के 700 मामले दर्ज किए गए, जिनमें प्रतिदिन एक दुष्कर्म की घटना हुई। ड्रग्स खुलेआम बेचे जा रहे हैं, गुंडों का आतंक फैला हुआ है, और गुलटेकड़ी मार्केट यार्ड में आपराधिक हस्तक्षेप बढ़ गया है। क्या ये घटनाएं भी देवेंद्र फडणवीस की 'योजना' का हिस्सा हैं?

वे 45 मीटर ऊंचे ध्वज स्तंभ के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत पुणे के नासरापुर की चार वर्षीय पीड़िता और महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अपराधों के अन्य पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई।

उन्होंने इसे घोर घृणित और भयावह विकृति का रूप बताया जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। फाइलों से जुड़े खुलासों के बाद कई प्रमुख वैश्विक हस्तियों ने इस्तीफा दे दिया है।

सपकाल ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अचानक युद्धविराम की घोषणा कर दी। आरोप है कि भारत को अमेरिकी दबाव में व्यापार समझौते के लिए मजबूर किया गया। अमेरिका यह भी निर्देश दे रहा है कि भारत को रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदना चाहिए, जबकि प्रधानमंत्री मोदी चुप हैं क्योंकि उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीय ध्वज के इन तीन रंगों के अर्थ और भावना को विकृत करने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तिरंगे का विरोध करता है और स्वतंत्रता के बाद लगभग 50-55 वर्षों तक अपने कार्यालयों में इसे नहीं फहराया। उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसी प्रवृत्तियों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।

सपकाल ने पुणे में प्रस्तावित 34,000 करोड़ रुपए की 54 किलोमीटर लंबी भूमिगत सड़क परियोजना की भी आलोचना की और इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि परियोजना की घोषणा से पहले कोई जन सुनवाई नहीं हुई और निर्वाचित पार्षदों से परामर्श नहीं लिया गया।

उनके अनुसार, यह परियोजना पुणे में भ्रष्टाचार को और बढ़ाएगी, और लोगों को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।

--आईएएनएस

 

 

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