भोपाल: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश के शासकीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की टीईटी अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग की है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका या क्यूरेटिव याचिका दायर करने का सुझाव दिया है।
मुख्यमंत्री यादव को दिग्विजय सिंह ने लिखा कि साल 2009 में केंद्र सरकार की ओर से शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया गया था, जिसे मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल 2010 से लागू किया गया। इसके पालन में सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र से संबंधित सिविल अपील और अन्य मामलों में निर्णय देते हुए सभी प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया है। हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 साल शेष हैं, उन्हें छूट प्रदान की गई है। परीक्षा में असफल रहने पर सेवा समाप्ति या सेवानिवृत्ति की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मध्य प्रदेश शासन के शिक्षा विभाग की ओर से मार्च 2026 में जारी आदेश के अनुसार सभी शिक्षकों को टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में संभावित है। इस आदेश के बाद से स्कूल शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग के दो लाख से अधिक शिक्षकों में गहरी चिंता व्याप्त है। 25–30 सालों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए सेवा के अंतिम चरण में इस प्रकार की परीक्षा अनिवार्यता अनुचित है। असफलता की स्थिति में हजारों शिक्षकों की आजीविका संकट में पड़ सकती है व उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है। साथ ही 40–50 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षकों के लिए इस प्रकार की परीक्षा की अनिवार्यता को भी न्यायसंगत नहीं माना गया है।
दिग्विजय सिंह ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि प्रभावित शिक्षक संगठनों के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिकाएं दायर करने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा। उन्होंने सुझाव दिया है कि राज्य सरकार स्वयं शिक्षकों का पक्ष न्यायालय में रखे, जिससे शिक्षकों को आर्थिक राहत मिलेगी और सरकार के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ होगा।
पत्र में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय महाराष्ट्र राज्य से संबंधित था और मध्य प्रदेश इस मामले में पक्षकार नहीं था। इसके बावजूद राज्य में इसे लागू कर दिया गया। जबकि मध्य प्रदेश में पहले से ही व्यावसायिक परीक्षा मंडल के माध्यम से टीईटी के समान कठोर परीक्षा प्रणाली लागू है, जिसके आधार पर वर्ग 1, 2 और 3 के शिक्षकों की नियुक्ति की जाती रही है।
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में सुझाव दिया है कि राज्य सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका या क्यूरेटिव याचिका दायर कर अपना पक्ष रखना चाहिए।
--आईएएनएस