CBI Court Verdict : सीबीआई कोर्ट का बड़ा फैसला, बैंक धोखाधड़ी मामले में दोषियों को तीन साल की सजा

बैंक धोखाधड़ी केस में सीबीआई कोर्ट का सख्त फैसला, सभी आरोपी दोषी करार।
सीबीआई कोर्ट का बड़ा फैसला, बैंक धोखाधड़ी मामले में दोषियों को तीन साल की सजा

नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कोर्ट की लखनऊ शाखा ने बैंक धोखाधड़ी के एक महत्वपूर्ण मामले में सख्त फैसला सुनाते हुए सभी लोगों को दोषी करार दिया।

अदालत ने सभी आरोपियों को तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाने के साथ ही कुल 3.4 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया, लाल बंगला शाखा, कानपुर के तत्कालीन सीनियर मैनेजर नरेश चंद्र भारद्वाज, साधना दीक्षित, राम जी शुक्ला, जितेंद्र श्रीवास्तव और प्रेम प्रकाश को दोषी करार दिया है।

यह मामला लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में था और अंततः अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपना निर्णय सुनाया।

इस प्रकरण की शुरुआत केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा 11 जनवरी 2008 को दर्ज की गई एफआईआर से हुई थी, जो बैंक ऑफ इंडिया, कानपुर जोन के तत्कालीन जोनल मैनेजर की लिखित शिकायत पर आधारित थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सीनियर मैनेजर नरेश चंद्र भारद्वाज ने 17 जुलाई 2006 से 26 अक्टूबर 2006 के बीच विक्रम दीक्षित और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर एक सुनियोजित आपराधिक साजिश रची।

इस साजिश के तहत आरोपियों ने ऐसे व्यक्तियों के नाम पर हाउसिंग लोन, ओडी मॉर्गेज लोन और ऑटो फाइनेंस लोन स्वीकृत किए, जो या तो अस्तित्व में ही नहीं थे या फिर फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे।

इस धोखाधड़ी के चलते बैंक ऑफ इंडिया को कुल 41.50 लाख रुपए का वित्तीय नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों ने इस राशि के बराबर का अनुचित लाभ प्राप्त किया।

मामले की विस्तृत जांच के बाद सीबीआई ने 26 अप्रैल 2010 को सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई।

--आईएएनएस

 

 

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