
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय बैठक में देश में संभावित बाढ़ और हीटवेव से निपटने की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सहयोग से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में 30 जोखिम भरी झीलों के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने की योजना में कम से कम 60 झीलों को शामिल किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्यों के स्तर पर बाढ़ के पूर्वानुमानों की एक समेकित व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के हर राज्य में बाढ़ संकट प्रबंधन टीमों (एफसीएमटी) का गठन कर इसे सक्रिय करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदाओं पर जारी एनडीएमए के दिशानिर्देशों के माध्यम से बेहतर जागरूकता और 'संपूर्ण सरकार' दृष्टिकोण विकसित हुआ है, लेकिन राज्य, जिला और नगरपालिका स्तर पर इन दिशानिर्देशों के पालन की समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एनडीएमए को अध्ययन करना चाहिए कि जंगलों में लगने वाली आगहीटवेव औरऔर बाढ़ से निपटने के लिए गृह मंत्रालय के निर्देशों और एनडीएमए के दिशानिर्देशों का कितने राज्य पालन कर रहे हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमें जीरो कैजुअल्टी डिजास्टर मैनेजमेंट के दृष्टिकोण को अमल में लाने पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि जल संचय और चेक डैम्स की परियोजनाओं से जल संरक्षण और जलस्तर में सुधार की और अधिक संभावनाओं को तलाशा जाए। हमारा उद्देश्य होना चाहिए कि हीटवेव से कृषि क्षेत्र को न्यूनतम नुकसान हो, साथ ही नदियों पर चेक डैम्स बना कर जल संरक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि कैम्पा फंड (सीएएमपीए फंड) का इस्तेमाल पर्यावरण संतुलन के लिए किए जा रहे प्रयासों को बहुआयामी बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
अमित शाह ने कहा कि एक ऐसा मास्टर प्लान बनाया जाना चाहिए जिससे जलवायु परिवर्तन की समस्या के कारण मौसम में आ रहे बदलावों और उनकी वजह से बढ़ रही आपदा संबंधी चुनौतियों से संपूर्ण सरकार और संपूर्ण समाज दृष्टिकोण अपना कर निपटा जा सके। उन्होंने बैठक में शामिल हुए मंत्रालयों/विभागों के अधिकारियों से कहा कि वे अब नए-नए ऐप या पोर्टल बनाने के बजाय मौजूद ऐप और पोर्टल को मजबूत कर बेहतर बनाने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा की मौसम संबंधी पूर्वानुमानों और चेतावनियों का व्यापक और प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आगामी मानसून को लेकर हमारे अनुमान और और मानसून में होने वाली कैजुअल्टी एवं हमारे पूर्वानुमान और कृषि क्षेत्र को होने वाले नुकसान का अध्ययन कर इसमें और सुधार करने की दिशा में प्रयास किया जाना चाहिए।
उन्होंने बैठक में शामिल हुए मंत्रालयों/विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों और उनके बीच के समन्वय की तारीफ की। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि मौसम संबंधी हमारी योजनाएं धरातल तक पहुंचें।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बाढ़ एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने हेतु तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रत्येक वर्ष केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा बाढ़ पूर्व तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की जाती है तथा उनके निर्देशों के अनुरूप अनेक महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं। इनमें भारतीय मौसम विभाग (आईएएमडी) और केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा वर्षा एवं बाढ़ पूर्वानुमान की अग्रिम अवधि को 3 दिनों से बढ़ाकर 7 दिन करना तथा हीट वेव पूर्वानुमान के मानकों में सुधार शामिल हैं।
बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय गृह सचिव, विभिमंत्रालयोंयें के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) तथा भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) एवं केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष सहित राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (एनआरएससी) और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
--आईएएनएस
