Wushu Martial Arts : आत्मरक्षा, फुर्ती और संतुलन का खेल, आदिमानवों ने भी किया इस कला का इस्तेमाल

वुशू: इतिहास, ताओलू और सांडा तकनीकें और मुकाबलों का परिचय।
वुशू: आत्मरक्षा, फुर्ती और संतुलन का खेल, आदिमानवों ने भी किया इस कला का इस्तेमाल

नई दिल्ली: चीनी मार्शल आर्ट 'वुशू' आत्मरक्षा, फुर्ती और संतुलन का खेल है, जो शारीरिक क्षमता, अनुशासन और मानसिक एकाग्रता को बढ़ाने में मदद करता है। 'वु' का अर्थ सैन्य या मार्शल 'युद्ध' है, जबकि 'शू' का मतलब 'कला' है। वुशू उन मार्शल आर्ट अभ्यासों के लिए एक सामूहिक शब्द है जिनकी शुरुआत और विकास चीन में हुआ। यह कला चीनी मार्शल आर्ट की संस्कृति और छवि को दर्शाती है।

 

माना जाता है कि वुशू की जड़ें 3000-1200 ईसा पूर्व से जुड़ी हैं। उस समय आदिमानव खुद की रक्षा के लिए इस तकनीक का प्रयोग करते थे। मध्यकालीन युग में इसे 'वी यू' के रूप में जाना गया। 1626-1644 के दौरान कविताओं में वुशू शब्द का उल्लेख भी मिलता है।

 

साल 1928 में नानजिंग (चीन) में नेशनल मार्शल आर्ट एकेडमी की स्थापना हुई, जिसमें इस खेल को बढ़ावा मिला। इसके बाद 1950 के दशक में चीनी सरकार ने इसे एक पारंपरिक खेल के रूप में मान्यता दी। साल 1990 में इंटरनेशनल वुशू फेडरेशन (आईडब्ल्यूयूएफ) का गठन हुआ। अगले ही साल बीजिंग में पहली वर्ल्ड चैंपियनशिप आयोजित की गई।

 

स्पोर्ट वुशू को दो मुख्य श्रेणियों 'ताओलू' और 'सांडा' में वर्गीकृत किया गया है।

 

वुशु के सेट रूटीन (फॉर्म) अभ्यास वाले हिस्से को 'ताओलू' कहते हैं। इसके रूटीन में पहले से तय तकनीकों का एक सेट होता है, जिसमें हमले और बचाव की शैली प्रस्तुत की जाती है। इनमें हाथ की तकनीकें, पैर की तकनीकें, कूदना, खड़े होने के तरीके और पैरों की चाल के साथ पकड़ना, फेंकना, कुश्ती और संतुलन शामिल हैं।

 

वहीं, सांडा में बगैर किसी हथियार के प्रदर्शन किया जाता है। यह पारंपरिक वुशु तकनीकों से विकसित हुआ है, जिसमें मुक्के मारना, लात मारना, फेंकना, कुश्ती और बचाव की तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

 

यह मुकाबले एक ऊंचे मंच पर होते हैं, जिसे 'लेताई' कहा जाता है। लेताई की ऊंचाई 80 सेंटीमीटर और चौड़ाई 8 मीटर और लंबाई 8 मीटर होती है। इस मंच पर हाई-डेंसिटी फोम लगा होता है, जिसे कैनवास से ढका जाता है। मंच के चारों ओर जमीन पर एक सुरक्षात्मक कुशन होता है। खिलाड़ी मुकाबले के समय सुरक्षात्मक गियर पहनते हैं, जिसमें हेडगार्ड, चेस्ट प्रोटेक्टर और दस्ताने, साथ ही माउथगार्ड और जॉकस्ट्रैप शामिल होते हैं।

 

मुकाबले में कुल 3 राउंड होते हैं। हर राउंड दो मिनट का होता है। प्रत्येक दो राउंड के बीच एक मिनट का ब्रेक मिलता है। विजेता का फैसला तब होता है, जब कोई खिलाड़ी 2 राउंड जीत ले, या उसका विरोधी नॉकआउट हो जाए।

 

--आईएएनएस

 

 

 

Related posts

Loading...

More from author

Loading...