नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। कुछ खिलाड़ियों को खेल विरासत में मिलता है और उनके कंधों पर उस विरासत को आगे ले जाने की बड़ी जिम्मेदारी और दबाव दोनों होता है। ऐसा ही कुछ रमेश कृष्णन के साथ भी था। पिता रामनाथन कृष्णन मशहूर टेनिस खिलाड़ी थे। हालांकि, रमेश ने पिता से भी अधिक उपलब्धियां अपने करियर में हासिल कीं और संघर्ष के दम पर अपनी खुद की पहचान बनाई।
रमेश कृष्णन का जन्म 5 जून, 1961 को चेन्नई में हुआ। पिता टेनिस खिलाड़ी थे और धीरे-धीरे रमेश का भी इस खेल के प्रति लगाव बढ़ता गया। रमेश ने जल्द ही टेनिस की बारीकियां सीख लीं और जूनियर स्तर पर अपनी काबिलियत से हर किसी का ध्यान खींचने लगे। 1979 का साल रमेश के लिए बेहद अहम साबित हुआ। इस साल उन्होंने जूनियर स्तर पर विंबलडन का खिताब अपने नाम किया। इसके बाद वह जूनियर स्तर पर फ्रेंच ओपन के टाइटल को भी अपने नाम करने में सफल रहे।
साल 1981 और 1987 में रमेश यूएस ओपन के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में सफल रहे। वहीं, 1986 में उन्होंने विंबलडन के क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि, उनके करियर का सबसे ऐतिहासिक साल 1989 साबित हुआ। ऑस्ट्रेलियन ओपन में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए उन्होंने तत्कालीन नंबर एक खिलाड़ी मैट्स विलेंडर को सीधे सेटों में हराते हुए पूरे विश्व को चौंका दिया। इस जीत ने रमेश को इंटरनेशनल स्तर पर पहचान दिलाई। रमेश ने 1987 में डेविस कप में भारतीय टीम को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने डेविस कप में भारत की अगुवाई भी की। रमेश ने अपनी काबिलियत और शानदार खेल के दम पर भारत को भी टेनिस में पहचान दिलाई।
रमेश का करियर उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने 8 एटीपी एकल खिताब जीते। 1993 में संन्यास लेने के बाद रमेश ने कोचिंग में अपना करियर शुरू किया। 1995 में उन्होंने कृष्णन टेनिस अकादमी की स्थापना की और कई युवा खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दी। उनकी देखरेख में टेनिस से कई दमदार खिलाड़ी उभरे, जिन्होंने विश्व स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करके दिखाया। टेनिस के खेल में अहम योगदान देने के लिए रमेश को साल 1998 में पद्मश्री पुरस्कार से भी नवाजा गया।