लिलिमा मिंज: साधारण आदिवासी परिवार से निकलकर ओलंपिक में किया देश का प्रतिनिधित्व

नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। लिलिमा मिंज भारतीय महिला हॉकी टीम की एक शानदार खिलाड़ी रही हैं। मिडफील्डर के तौर पर टीम इंडिया के लिए उनका करियर बेहतरीन और उपलब्धियों से भरपूर रहा है।

लिलिमा का जन्म 10 अप्रैल 1994 को ओड़िशा के सुंदरगढ़ जिले में एक साधारण आदिवासी परिवार में हुआ था। ओड़िशा एक ऐसी जगह है जहां हॉकी का प्रभाव रहा है। दिलीप टिर्की जैसे दिग्गज खिलाड़ी यहां से निकले हैं और भारतीय हॉकी का बड़ा चेहरा बने हैं। टिर्की जैसे खिलाड़ियों से प्रभावित होकर लिलिमा ने हॉकी में करियर बनाने का सपना देखा।

वह एक साधारण आदिवासी परिवार से निकलकर ओलंपियन बनीं और 2010 से 2020 के बीच महिला हॉकी के उत्थान में अहम योगदान दिया।

स्थानीय जगहों पर खेलते हुए, उन्होंने हॉकी खिलाड़ी के रूप में अपनी प्रतिभा को निखारा और धीरे-धीरे जूनियर टीम में अपनी जगह बनाई। 2011 में, वह उस इंडियन जूनियर टीम का हिस्सा थीं जिसने बैंकॉक, थाईलैंड में लड़कियों की अंडर-18 एशिया कप हॉकी चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। उनके बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए, इसी साल उन्हें सीनियर भारतीय टीम में खेलने का मौका मिला। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर 2011 से 2022 तक रहा। इस दौरान, भारतीय सीनियर टीम के लिए, उन्होंने 156 मैच खेले। भारत के लिए मिडफील्डर के रूप में खेलते हुए, वह विपक्षी टीम की रक्षा पंक्ति को तोड़ते हुए गेंद को गोल तक ले जाने की अपनी क्षमता के लिए जानी गईं।

लिलिमा मिंज के करियर के अहम और यादगार पड़ावों पर गौर करें तो 2014 एशियन गेम्स में कांस्य जीतने वाली भारतीय टीम की वह सदस्य रही थीं। रियो ओलंपिक 2016 के लिए क्वालिफाई करने वाली टीम की वह सदस्य रही थीं। 2018 एशियन गेम्स में रजत पदक जीतने वाली टीम की वह सदस्य रही थीं। कॉमनवेल्थ गेम्स, हॉकी वर्ल्ड लीग और एशिया कप सहित कई दूसरे टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

लिलिमा उस पीढ़ी का हिस्सा थीं जिसने भारतीय महिला हॉकी को गुमनामी से एशियाई और वैश्विक मंच पर एक प्रतियोगी ताकत बनाने में मदद की। जनवरी 2022 में, सिर्फ 27 साल की उम्र में, लिलिमा ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास की घोषणा की।

--आईएएनएस

पीएके

Related posts

Loading...

More from author

Loading...