सान्या (चीन): ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (ओसीए) एशियन गेम्स को समर ओलंपिक 2032 से ठीक एक साल पहले रीशेड्यूल करने का प्लान बना रहा है। इसका मकसद इस महाद्वीपीय इवेंट को दुनिया के सबसे बड़े स्पोर्ट्स शोकेस के साथ बेहतर तरीके से संरेखित करना है।
ओसीए के वाइस प्रेसिडेंट सॉन्ग लुजेंग ने सोमवार को सिन्हुआ को बताया कि यह समायोजन दोहा एशियन गेम्स से लागू होने की उम्मीद है, जिसे 2030 से 2031 में शिफ्ट किया जाएगा। इस प्रस्ताव को ओसीए कार्यकारिणी बोर्ड ने पहले ही मंजूरी दे दी है और अब इस पर इंटरनेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन के साथ आगे बातचीत चल रही है।
सोंग ने कहा, "इससे एशियन गेम्स ओलंपिक के लिए क्वालिफाइंग इवेंट के तौर पर काम कर सकेंगे, जिससे ज्यादा एलीट एथलीट को प्रतियोगिता के कीमती मौके मिलेंगे और गेम्स का ओवरऑल स्टैंडर्ड बढ़ेगा।" सोंग ने बताया कि ओलंपिक क्वालिफिकेशन को अभी इंटरनेशनल फेडरेशन मैनेज करते हैं और ओसीए नए प्लान पर उनमें से कुछ के साथ बातचीत के आखिरी स्टेज में है। अगर यह आइडिया मंजूर हो जाता है, तो यह बदलाव दोहा 2030 एशियन गेम्स से शुरू होगा, जिसे 2031 तक टाल दिया जाएगा। इसका असर रियाद 2034 एशियन गेम्स पर पड़ेगा, जो बाद में 2035 में होंगे।
इसके उलट, पहले से तय आइची-नागोया 2026 एशियन गेम्स अपने मूल स्लॉट 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक ही रहेंगे। खास बात यह है कि भारत 1982 के बाद पहली बार एशियन गेम्स की मेजबानी करना चाहता है। भारत ने एशियन गेम्स 2038 की मेजबानी करने में दिलचस्पी दिखाई है, और चीन के सान्या में ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (ओसीए) की कार्यकारिणी बोर्ड मीटिंग में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई है। हालांकि, नई दिल्ली ने 1951 में एशियन गेम्स का पहले संस्करण की मेजबानी की थी। वहीं, आखिरी बार भारत ने इस इवेंट की मेजबानी साल 1982 में की थी। यही वजह है कि भारत 2038 में होने वाले एशियन गेम्स की मेजबानी हासिल करने के लिए पूरा जोर लगाना चाहेगा।
--आईएएनएस
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