अस्मिता एथलेटिक्स लीग में चमकीं हजारीबाग की बेटियां, ओलंपिक 2036 पर नजर

हजारीबाग, 2 दिसंबर (आईएएनएस)। भारत की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपना दमखम दिखा रही हैं। पढ़ाई-लिखाई हो, नौकरी हो या खेल का मैदान, अब लड़कियां किसी भी जगह पीछे नहीं हैं। झारखंड के हजारीबाग की बेटियां भी कुछ ऐसा ही कर दिखाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। उनका एक ही लक्ष्य है कि किसी दिन भारत की जर्सी पहनकर ओलंपिक में उतरना और देश के लिए मेडल जीतकर लौटना।

उसी सपने को सच बनाने की दिशा में 'अस्मिता एथलेटिक्स लीग' एक बड़ी सीढ़ी है, जिसका आयोजन युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय, साई और भारतीय एथलेटिक्स संघ की ओर से किया जा रहा है।

यह लीग खासतौर पर 14 साल और 16 साल से कम उम्र की बालिकाओं के लिए है। इसका मकसद है कि गांव-कस्बों की प्रतिभाशाली लड़कियों को भी वही मौके मिलें, जो अब तक ज्यादातर लड़कों तक सीमित थे। प्रतियोगिता जीतने वाली बेटियों को मेडल और प्रमाणपत्र दिए जा रहे हैं, ताकि उनके मन में आगे बढ़ने का उत्साह और भी मजबूत हो।

भारत ने 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए अहमदाबाद का नाम इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी के सामने भेजा है। इसलिए भी देशभर की लड़कियों में अब एक नई ऊर्जा दिख रही है। वे कह रही हैं, जब 2036 में ओलंपिक हमारे देश में ही होना है, तो क्यों न हम ही इसमें उतरें। इसी सोच के साथ वे अभी से जी-तोड़ मेहनत कर रही हैं।

हजारीबाग के कर्जन ग्राउंड में हुई अस्मिता एथलेटिक्स लीग-2025-26 में भी यह उत्साह साफ दिखा। अंडर-14 और अंडर-16 की लड़कियों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। कोई दौड़ में चमकी, कोई भाला फेंक में, तो किसी ने ऊंची कूद या लंबी कूद में अपनी प्रतिभा साबित की।

डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स कोऑर्डिनेटर सरोज कुमार यादव ने बताया कि एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और भारत सरकार के बीच एक एमओयू हुआ है। इसके तहत देशभर में ग्रासरूट लेवल पर खिलाड़ियों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। गांव-देहात की छोटी-छोटी प्रतियोगिताओं से ही ऐसे खिलाड़ियों को तलाशा जाएगा, जिन्हें आगे चलकर खेलो इंडिया और फिर ओलंपिक तक ले जाया जा सके।

डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स प्रेसिडेंट अजीत कुमार ने बताया कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विजन 2036' के तहत हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक ऐसी प्रतियोगिताएं केवल लड़कों के लिए होती थीं, लेकिन अब सरकार इस सोच को बदल रही है। आज जरूरत इस बात की है कि गांव की बेटियों को भी वही मौका मिले, जो शहरों की लड़कियों को मिलता है। अस्मिता लीग उन्हीं सपनों का पंख है।

युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय की ओर से देश के करीब 300 जिलों में ऐसे आयोजन किए जा रहे हैं, जिनका लक्ष्य टैलेंटेड लड़कियों को पहचानना, उन्हें ट्रेनिंग देना और भविष्य की बड़ी-बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है।

लीग में हिस्सा लेने वाली छात्रा वर्षा कुमारी ने खुशी जताई। उसने बताया कि यहां कई तरह के गेम कराए जा रहे हैं। मैंने हाई जंप और लॉन्ग जंप में हिस्सा लिया और दोनों में गोल्ड मेडल जीता। पहले लड़कियों के लिए ऐसे मौके बहुत कम मिलते थे, लेकिन अब हमें खेलने का मौका दिया जा रहा है। हम ओलंपिक की तैयारी भी कर रहे हैं।

एक अन्य प्रतिभागी मुस्कान कुमारी ने बताया कि यहां ओलंपिक गेम्स जैसी तैयारी कराई जा रही है। हमें बहुत अच्छा लगा, क्योंकि हर बार लड़कों के गेम होते थे, लेकिन इस बार लड़कियों के लिए इतने बड़े स्तर पर आयोजन हुआ है। हमें बहुत खुशी है कि पहली बार हमें भी पूरा मौका मिला।

--आईएएनएस

पीआईएम/एबीएम

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